औरंगाबाद: देवकुंड में श्रावणी मेला की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन अलर्ट, डीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण
Magadh Express:औरंगाबाद: श्रावण मास के पवित्र महीने में गोह प्रखंड स्थित देवकुंड में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। जिलाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने आज देवकुंड का स्थलीय निरीक्षण किया और मेला के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़ी तैयारियों की बारीकी से समीक्षा की।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा प्राथमिकता
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि ‘श्रावणी मेला’ में आने वाले शिव भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। तैयारियों के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- भीड़ नियंत्रण: श्रद्धालुओं के सुगम आवागमन के लिए मजबूत बैरिकेडिंग की व्यवस्था करने और प्रवेश व निकास मार्गों को स्पष्ट रूप से चिह्नित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भीड़ को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके।
- प्रकाश व्यवस्था: रात्रि में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए मेला परिसर और मुख्य रास्तों पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और फ्लड लाइट्स लगाने को कहा गया है।
- विधि-व्यवस्था: जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मेला अवधि के दौरान पर्याप्त संख्या में पुलिस बल और दंडाधिकारियों (मजिस्ट्रेट्स) की तैनाती की जाएगी ताकि विधि-व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद रहे।

बुनियादी सुविधाओं और पहुंच पर विशेष जोर
श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुँचने में कोई असुविधा न हो, इसके लिए जिलाधिकारी ने देवकुंड तक जाने वाले संपर्क मार्गों का भी जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि सड़कों की मरम्मत और संधारण का कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया जाए। साथ ही, वाहनों की पार्किंग के लिए भी उचित स्थान चिन्हित करने का निर्देश दिया गया है।
प्रशासन का स्पष्ट संदेश: आपसी समन्वय से कार्य करें
जिलाधिकारी ने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और यातायात का सुगम प्रबंधन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। बैठक में अनुमंडल पदाधिकारी (दाउदनगर) श्री अमित राजन, गोह के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि मेला शुरू होने से पहले सभी कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएं और मेला अवधि के दौरान सतत निगरानी रखी जाए, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके और एक शांतिपूर्ण व भक्तिमय वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
