औरंगाबाद: मंडल कारा में स्वास्थ्य सेवाओं का आधुनिकीकरण, AI तकनीक से बंदियों की होगी टीबी स्क्रीनिंग
Magadh Express:औरंगाबाद जिले के मंडल कारा में बंदियों के स्वास्थ्य को लेकर जिला प्रशासन ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की है। कारा में निरुद्ध बंदियों में टीबी (क्षय रोग) की समय रहते पहचान और उपचार सुनिश्चित करने के लिए ‘एआई आधारित हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीन’ से विशेष स्क्रीनिंग अभियान की शुरुआत की गई है। जिलाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा के निर्देश पर 18 जुलाई 2026 को इस आधुनिक अभियान का संचालन किया गया।

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से मिलेगी सटीक जांच
स्वास्थ्य सेवाओं में आधुनिक तकनीक का समावेश करते हुए, अब टीबी की जांच के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) का सहारा लिया जा रहा है। हैंडहेल्ड डिजिटल एक्स-रे मशीन के माध्यम से बंदियों के एक्स-रे किए जा रहे हैं और एआई सॉफ्टवेयर की मदद से उनका त्वरित विश्लेषण किया जा रहा है। इस तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह टीबी के शुरुआती लक्षणों (TB Suspect) को बहुत सटीकता और तेजी से पकड़ने में सक्षम है।

कैसे काम करेगा यह स्क्रीनिंग प्रोटोकॉल?
प्रशासन ने इस अभियान के लिए एक स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की है:
- स्क्रीनिंग: एआई आधारित मशीन से सभी बंदियों का एक्स-रे किया जा रहा है।
- पुष्टि (Confirmation): जिन बंदियों की रिपोर्ट में टीबी की आशंका पाई जाएगी, उनकी आगे की जांच स्वास्थ्य विभाग के प्रोटोकॉल के अनुसार की जाएगी। इसमें स्पुटम जांच, ट्रूनेट (TruNat) या सीबी-एनएएटी (CB-NAAT) जैसे उन्नत परीक्षण शामिल हैं।
- उपचार और पोषण: टीबी की पुष्टि होने पर मरीज को ‘राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम’ (NTEP) के तहत मुफ्त दवाएं, नियमित डॉक्टरी सलाह और पोषण सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

’टीबी मुक्त औरंगाबाद’ के लक्ष्य की ओर कदम
जिलाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि मंडल कारा के साथ-साथ जिले के अन्य सभी संवेदनशील और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में ‘एक्टिव केस फाइंडिंग’ (Active Case Finding) अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग न केवल मरीजों की समय पर पहचान करने में मदद करेगा, बल्कि कारा के भीतर संक्रमण के प्रसार को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाएगा।

यह अभियान प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत औरंगाबाद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की एक और बड़ी उपलब्धि है। आधुनिक चिकित्सा उपकरणों के उपयोग से प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि टीबी जैसी गंभीर बीमारी का कोई भी संदिग्ध मरीज इलाज से वंचित न रहे।

