Aurangabad:नीट परीक्षा के परिणाम से निराश होकर घर छोड़ने वाली छात्रा वाराणसी से सकुशल बरामद,काशी विश्वनाथ के पुजारी ने परिजनों को दी फोन पर जानकारी
संदीप कुमार, नवीनगर
Magadh Express: नीट (NEET) जैसी कठिन प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा का दबाव और उसमें अपेक्षित सफलता न मिल पाने का दर्द एक छात्रा को इतना गहरा लगा कि उसने घर छोड़ने जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया। नवीनगर की रहने वाली 18 वर्षीय छात्रा रंगोली जिंदल के गायब होने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया था। हालांकि, करीब 20 घंटे की गहन तलाश और अनिश्चितता के बाद, वह वाराणसी में सुरक्षित रूप से मिल गई है।
घटना का विवरण
नवीनगर के शनिचर बाजार निवासी रंजन अग्रवाल उर्फ पुन्नू अग्रवाल की पुत्री रंगोली जिंदल ने इस वर्ष नीट की परीक्षा दी थी। परीक्षा के बाद वह अपने परिणाम को लेकर काफी आश्वस्त थी और उसने अपने पिता से कहा था, “पापा, इस बार हो जाएगा।” लेकिन गुरुवार रात जब परीक्षा परिणाम घोषित हुए और सूची में अपना नाम न पाकर वह गहरे सदमे में चली गई।
परिजनों ने उसे सांत्वना देने और समझाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन मन में बैठी निराशा के कारण वह पूरी तरह टूट गई थी। शुक्रवार तड़के लगभग 4 बजे, जब परिवार के सदस्य सो रहे थे, रंगोली बिना किसी को बताए घर से निकल गई। सुबह जब उसकी मां वंदना अग्रवाल ने उसे कमरे में नहीं पाया और उसका मोबाइल भी बंद मिला, तो परिजनों के होश उड़ गए।

20 घंटे का संघर्ष और तलाश
बेटी के अचानक गायब होने से घबराए परिजनों ने तत्काल स्थानीय पुलिस (नवीनगर थाना) को सूचित किया और खुद भी उसकी तलाश शुरू कर दी। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज खंगालने पर रंगोली की लोकेशन वाराणसी के काशी स्टेशन पर ट्रेस हुई। सूचना मिलते ही परिजन बिना देरी किए वाराणसी पहुंचे।
शुक्रवार देर रात तक चली खोजबीन के बाद, काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप स्थित एक मंदिर के पुजारी ने परिजनों को फोन कर एक युवती के वहां मौजूद होने की जानकारी दी। पुजारी ने बताया कि एक छात्रा भूखी-प्यासी अवस्था में मंदिर में बैठी है। वहां पहुंचने पर परिजनों ने रंगोली की पहचान की। बेटी को सकुशल देख परिजन भावुक हो गए और पुजारी की सतर्कता के लिए उनका आभार व्यक्त किया। शनिवार सुबह परिजन उसे सुरक्षित अपने घर वापस ले आए।
विशेषज्ञों की सलाह और पिता का संदेश
चिकित्सकों ने छात्रा की स्थिति का आकलन करने के बाद स्पष्ट किया है कि रंगोली को इस समय किसी भी प्रकार के दबाव से दूर रखने और परिवार के पूर्ण भावनात्मक सहयोग की आवश्यकता है।
इस घटना के बाद, भावुक पिता रंजन अग्रवाल ने अपनी बेटी को और अन्य सभी छात्रों को एक अत्यंत महत्वपूर्ण संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “बेटा, रिजल्ट से जिंदगी नहीं लिखी जाती। तू हमारे लिए पहले भी अनमोल थी और आज भी है।”
यह घटना समाज के लिए एक बड़ा आईना है। यह याद रखना आवश्यक है कि:
- परीक्षा केवल एक पड़ाव है: किसी भी परीक्षा का परिणाम किसी छात्र की पूरी क्षमता या भविष्य का अंतिम फैसला नहीं होता।
- संवाद जरूरी है: असफलता के समय बच्चों के साथ संवाद करना और उन्हें यह महसूस कराना कि वे अकेले नहीं हैं, सबसे बड़ी ताकत है।
- मानसिक स्वास्थ्य सर्वोपरि है: परीक्षाओं का दबाव बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकता है, जिसे अभिभावकों और समाज को समझना होगा।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन किसी भी परीक्षा से कहीं अधिक मूल्यवान है। असफलता का अर्थ हार नहीं, बल्कि नई शुरुआत का एक अवसर होना चाहिए।
