बिहार:एससी-एसटी कल्याण विभाग पर BiSSWA का सवाल, सरकार को अल्टीमेटम,सात सूत्री मांगों पर कार्रवाई की मांग, विकास योजनाओं और संसाधनों की कमी का उठाया मुद्दा
Magadh Express:बिहार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण पदाधिकारी संघ (BiSSWA) ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की कार्यप्रणाली और पदाधिकारियों को उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों को लेकर राज्य सरकार के समक्ष सात सूत्री मांगें रखी हैं। संघ ने सरकार को मांगों पर समयबद्ध कार्रवाई का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि विभाग को पर्याप्त मानव संसाधन, आधारभूत संरचना और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराना जरूरी है। संघ का कहना है कि विभाग को मजबूत किए बिना एससी-एसटी समुदायों के लिए संचालित कल्याणकारी एवं विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन संभव नहीं है।
BiSSWA के अध्यक्ष दिवेश दिवाकर ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक विकास की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी कल्याण विभाग पर है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर योजनाओं को लागू करने वाले कल्याण पदाधिकारियों को कई स्थानों पर मूलभूत प्रशासनिक एवं आधारभूत सुविधाएं तक पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों और संसाधनों की कमी के कारण पदाधिकारियों को अपने नियमित कार्यों के साथ अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती हैं, जिसका सीधा असर विभागीय योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर पड़ता है।
क्षेत्र भ्रमण के लिए वाहन अथवा यात्रा भत्ता की मांग
संघ ने बताया कि प्रखंड और अनुमंडल स्तर पर तैनात कल्याण पदाधिकारियों को लगातार क्षेत्र भ्रमण करना पड़ता है। उन्हें विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी, निरीक्षण, छात्रावासों का जायजा, लाभुकों से संबंधित कार्य और विभागीय योजनाओं की प्रगति की समीक्षा जैसी जिम्मेदारियां निभानी होती हैं। इसके बावजूद कई पदाधिकारियों को सरकारी वाहन अथवा पर्याप्त यात्रा भत्ता उपलब्ध नहीं है।
BiSSWA ने फील्ड स्तर पर कार्य को प्रभावी बनाने के लिए सरकारी वाहन उपलब्ध कराने या निर्धारित एवं पर्याप्त यात्रा भत्ता देने की मांग की है। संघ का कहना है कि बिना पर्याप्त परिवहन सुविधा के दूरदराज के क्षेत्रों में योजनाओं की नियमित निगरानी करना कठिन हो जाता है।
कार्यालय और तकनीकी संसाधन उपलब्ध कराने की मांग
संघ ने कल्याण पदाधिकारियों के लिए समुचित कार्यालय व्यवस्था सुनिश्चित करने की भी मांग की है। इसके तहत कार्यालयों में लिपिकीय सहयोग, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कंप्यूटर, फर्नीचर सहित अन्य आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
अध्यक्ष दिवेश दिवाकर के अनुसार, वर्तमान समय में विभागीय कार्य तेजी से डिजिटल हो रहे हैं। ऐसे में कंप्यूटर, इंटरनेट, डाटा एंट्री और पर्याप्त सहयोगी कर्मियों के अभाव में अधिकारियों पर कार्य का दबाव बढ़ता है और योजनाओं के क्रियान्वयन में भी परेशानी आती है।
राजपत्रित दर्जा और संवर्ग नियमावली में संशोधन की मांग
BiSSWA ने कल्याण पदाधिकारियों को राजपत्रित दर्जा देने की मांग भी उठाई है। इसके साथ ही स्कूल एवं छात्रावास प्रबंधन से जुड़े पदों पर आवश्यक नियुक्तियां करने और संवर्ग नियमावली में संशोधन करने की मांग की गई है।
संघ का कहना है कि विभाग के कार्यों का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में पदों की संख्या, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक संरचना में आवश्यक बदलाव किया जाना समय की जरूरत है।
पारदर्शी स्थानांतरण नीति और सामूहिक दंड से संरक्षण
सात सूत्री मांगों में पारदर्शी स्थानांतरण नीति लागू करने तथा सामूहिक दंडात्मक कार्रवाई से कल्याण पदाधिकारियों को संरक्षण देने की मांग भी शामिल है। संघ का कहना है कि स्थानांतरण की प्रक्रिया स्पष्ट और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि पदाधिकारियों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर विश्वास बना रहे।
BiSSWA ने यह भी कहा है कि किसी एक स्तर पर हुई प्रशासनिक अथवा योजनागत कमी के लिए सामूहिक रूप से अधिकारियों को दंडित करने की व्यवस्था उचित नहीं है। जिम्मेदारी तय करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर तथ्यों और परिस्थितियों की समीक्षा की जानी चाहिए।
विकास योजनाओं के लिए ठोस कार्ययोजना की मांग
संघ ने स्पष्ट किया कि उसकी मांगें केवल कल्याण पदाधिकारियों की सुविधाओं तक सीमित नहीं हैं। इसका सीधा संबंध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लिए संचालित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से है।
अध्यक्ष दिवेश दिवाकर ने कहा कि एससी-एसटी समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए स्पष्ट लक्ष्य, पर्याप्त बजट और परिणाम आधारित योजनाएं तैयार करने की जरूरत है। योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित निगरानी और जमीनी स्तर पर उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन भी जरूरी है।
कई बार मामला उठाने के बाद आंदोलन का ऐलान
संघ का आरोप है कि पदाधिकारियों की समस्याओं और मांगों को पहले भी विभागीय अधिकारियों के समक्ष कई बार उठाया गया, लेकिन अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद BiSSWA ने चरणबद्ध आंदोलन का निर्णय लिया है।
संघ की घोषित आंदोलनात्मक रणनीति के तहत 27 अगस्त को सदस्य नीले रिबन या बैज लगाकर कार्य करेंगे। इसके बाद 11 सितंबर को काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध किया जाएगा। BiSSWA ने कहा है कि यदि इसके बाद भी सरकार की ओर से मांगों पर ठोस और सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो आगे की रणनीति पर संघ की समिति निर्णय लेगी।
सरकार से समयबद्ध निर्णय की मांग
BiSSWA ने राज्य सरकार से सात सूत्री मांगों पर समयबद्ध निर्णय लेने की अपील की है। संघ ने कल्याण विभाग में पर्याप्त मानव संसाधन, कार्यालयी सुविधाएं, तकनीकी संसाधन, परिवहन सुविधा और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग दोहराई है।
संघ का कहना है कि कल्याण विभाग को मजबूत करना केवल विभागीय पदाधिकारियों की सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर उन योजनाओं पर पड़ता है जिनका उद्देश्य अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के जरूरतमंद लोगों तक शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सहायता और विकास का लाभ पहुंचाना है। इसलिए सरकार को संघ की मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए समयबद्ध समाधान की दिशा में पहल करनी चाहिए।
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