गया: नगर निगम बोर्ड बैठक में हंगामे पर भड़के मेयर, कहा- “विकास की राजनीति के बजाय विवाद करना चाहते हैं कुछ लोग”

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​धीरज गुप्ता , गया

Magadh Express : गया नगर निगम की हालिया बोर्ड बैठक में हुए भारी हंगामे ने शहर की राजनीति में गरमाहट ला दी है। बैठक के दौरान हुए शोर-शराबे और कार्य में बाधा उत्पन्न करने के प्रयासों पर मेयर वीरेंद्र कुमार उर्फ गणेश पासवान ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि किसी भी सूरत में शहर के विकास कार्यों को रुकने नहीं दिया जाएगा।

​”वार्ड-29 को सबसे ज्यादा मिली हैं योजनाएं”

​मेयर ने बैठक में हुए हंगामे के पीछे के कारणों को निराधार करार दिया। विशेष रूप से वार्ड-29 के पार्षद रणधीर गौतम और उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए ‘वार्ड की उपेक्षा’ के आरोपों पर मेयर ने नगर निगम के आधिकारिक रिकॉर्ड का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि यदि आंकड़ों को देखा जाए, तो निगम की सबसे अधिक विकास योजनाएं वार्ड-29 को ही आवंटित की गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि गलत तथ्यों के आधार पर सदन में भ्रम फैलाया जा रहा है।

​”विकास की गति रोकने की साजिश”

​मेयर गणेश पासवान ने कहा कि, “कुछ लोग विकास की राजनीति करने के बजाय विवाद की राजनीति करना चाहते हैं।” उन्होंने कहा कि जब भी शहर के हित में बड़े और महत्वपूर्ण निर्णय लेने का समय आता है, तब कुछ लोग बेवजह हंगामा खड़ा कर देते हैं ताकि जनता को गुमराह किया जा सके। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस तरह के हथकंडे शहर के विकास की रफ्तार को नहीं रोक सकते।

​स्वच्छता में गया का डंका, उपलब्धियों को बताया सामूहिक प्रयास

​मेयर ने गया नगर निगम की पिछले तीन वर्षों की उपलब्धियों को याद दिलाते हुए कहा कि निगम ने अपनी कार्यक्षमता साबित की है।

  • राज्य स्तरीय उपलब्धि: गया नगर निगम स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार बिहार में प्रथम स्थान पर काबिज है।
  • राष्ट्रीय पहचान: निगम ने राष्ट्रीय स्तर पर 27वां स्थान प्राप्त कर पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है।

​उन्होंने स्पष्ट किया कि यह गौरव किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि नगर निगम की टीम, सभी जागरूक जनप्रतिनिधियों और गया शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के सामूहिक सहयोग का प्रतिफल है।

​सदन की गरिमा सर्वोपरि

​मेयर ने सभी पार्षदों और जनप्रतिनिधियों को याद दिलाया कि सदन की गरिमा बनाए रखना उनकी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि निगम जनता के हितों के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ काम कर रहा है। किसी भी राजनीतिक स्वार्थ, दबाव या हंगामे के आगे झुककर विकास कार्यों से समझौता नहीं किया जाएगा। फिलहाल, निगम के मेयर का यह कड़ा बयान शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और विपक्षी पार्षदों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है।

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