Aurangabad:देव नगर में भारी वाहनों का कहर: भीषण जाम से स्कूली बच्चों का भविष्य और सुरक्षा दांव पर, नागरिकों में भारी आक्रोश
Magadh Express:बिहार के औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी देव का जनजीवन इन दिनों भारी वाहनों के अनियंत्रित आवागमन और भीषण जाम की समस्या से त्रस्त हो गया है। अम्बा दोमुंहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद से ही नगर पंचायत देव की मुख्य सड़कें भारी मालवाहक वाहनों का गलियारा बन गई हैं, जिसके कारण यहाँ की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
स्कूली बच्चों के लिए ‘परीक्षा’ बनी आवाजाही
इस जाम की मार सबसे अधिक नगर के स्कूली बच्चों पर पड़ रही है। अभिभावकों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगर पंचायत प्रतिनिधियों को लिखे एक ‘खुले पत्र’ के माध्यम से इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान आकृष्ट किया है।
चिंतित नागरिकों के अनुसार, सुबह जब बच्चे स्कूल के लिए निकलते हैं और दोपहर में वापस लौटते हैं, तब सड़कों पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लगी होती हैं। कई स्कूली बसें घंटों जाम में फंसी रहती हैं, जिससे न केवल बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि भीषण गर्मी और असुरक्षित माहौल में उनका घंटों बस के अंदर बैठना स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से भी चिंताजनक है।

सड़कों की बदहाली और सुरक्षा पर सवाल
भारी वाहनों के लगातार दबाव के कारण देव नगर की सड़कें जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो रही हैं। उड़ती धूल और बड़े वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी लगातार बना हुआ है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने भारी वाहनों के प्रवेश पर नियंत्रण नहीं पाया, तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है।दिन तो दिन रात्रि में भी घंटों जाम लगने से स्थानीय लोगों कि परेशनियां बढ़ी हुई है ।

प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
नगर पंचायत देव के जागरूक नागरिकों और ‘Undefeatable Gauraw’ जैसे स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने जिला प्रशासन, डीएम और नगर पंचायत के अध्यक्ष श्री पिंटू साहिल व उपाध्यक्ष श्री गोलू गुप्ता से निम्नलिखित मांगें की हैं:
- विद्यालय समय में प्रतिबंध: स्कूल खुलने और बंद होने के समय (पीक ऑवर्स) में भारी वाहनों के प्रवेश पर पूर्णतः रोक लगाई जाए।
- वैकल्पिक मार्ग: भारी वाहनों के लिए नगर से बाहर कोई वैकल्पिक रास्ता चिन्हित किया जाए।
- यातायात प्रबंधन: नगर के मुख्य चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती हो ताकि जाम की स्थिति को नियंत्रित किया जा सके।

क्या कहते हैं स्थानीय निवासी?
नगर के निवासियों का कहना है, “देव एक धार्मिक नगरी है जहाँ श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन वर्तमान में यहाँ की स्थिति नरक जैसी हो गई है। हमारी आने वाली पीढ़ी के भविष्य और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ हो रहा है। हम प्रशासन से उम्मीद करते हैं कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर समाधान प्रदान करेंगे।”
अब देखने वाली बात यह है कि जिला प्रशासन इस ‘खुले पत्र’ और जनहित की इस मांग पर कब तक संज्ञान लेते हुए देव की सड़कों को जाममुक्त बनाने की दिशा में ठोस कार्रवाई करता है।
