औरंगाबाद: प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी पैदावार और सुरक्षित रहेगी मिट्टी, कृषि विज्ञान केंद्र में किसानों को मिली तकनीकी सीख

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Magadh Express:पारंपरिक रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों को कम करने और किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, आज औरंगाबाद के सिरिस स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में एक दिवसीय “प्राकृतिक खेती विषयक प्रशिक्षण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। आत्मा कार्यालय, औरंगाबाद द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का उद्घाटन औरंगाबाद सदर के विधायक श्री त्रिविक्रम नारायण सिंह, विधान परिषद सदस्य श्री दिलीप सिंह और जिला कृषि पदाधिकारी श्री संदीप राज ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।

प्राकृतिक खेती की ओर कदम: लागत में कमी और बेहतर उत्पादन

कार्यक्रम के दौरान अतिथियों का स्वागत पौध गमला भेंट कर किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित करना था। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को विस्तार से समझाया कि कैसे कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।

जैविक नुस्खों का महत्त्व: गौ-आधारित खेती पर जोर

वैज्ञानिकों ने रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के स्थान पर प्राकृतिक विकल्पों के प्रयोग पर विशेष जोर दिया। प्रशिक्षण में मुख्य रूप से निम्नलिखित तकनीकी बिंदुओं पर चर्चा हुई:

  • जैविक इनपुट: किसानों को जीवामृत, बीजामृत और नीमास्त्र के निर्माण और प्रयोग की विधि सिखाई गई।
  • गोबर और गौमूत्र का उपयोग: देशी गाय के गोबर और मूत्र से तैयार कीटनाशकों के उपयोग से न केवल फसलों को सुरक्षा मिलती है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी लंबे समय तक बनी रहती है।
  • मिट्टी का स्वास्थ्य: विशेषज्ञों ने बताया कि प्राकृतिक खेती से मिट्टी की संरचना में सुधार होता है और पर्यावरण प्रदूषण पर भी लगाम लगती है।

किसानों में दिखा उत्साह

इस सत्र में जिले भर से आए किसानों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए और जैविक खेती के परिणामों पर चर्चा की। किसानों ने वैज्ञानिकों से तकनीकी समस्याओं पर प्रश्न पूछे और अपने खेतों में इन विधियों को अपनाने का संकल्प लिया।

प्रशासन की पहल

जिला कृषि पदाधिकारी श्री संदीप राज ने कहा कि सरकार की मंशा किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ फसल उत्पादन की है। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने किसानों से आह्वान किया कि वे अपनी खेती में बदलाव लाएं ताकि भविष्य में टिकाऊ और समृद्ध कृषि व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके।
इस कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, जैविक नोडल पदाधिकारी, कृषि सखियों और जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए सैकड़ों किसान भाई-बहन उपस्थित रहे।

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