राष्ट्रीय:असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रलोभन पर निर्वाचन आयोग का कड़ा प्रहार: ₹1,400 करोड़ से अधिक की नकदी, शराब और ड्रग्स जब्त

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नई दिल्ली: विधानसभा आम चुनाव और उपचुनाव 2026 के दौरान निष्पक्ष और प्रलोभन-मुक्त मतदान सुनिश्चित करने के लिए भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में 1,444.96 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड जब्ती की गई है।

जब्ती में 40% की भारी बढ़ोतरी

​निर्वाचन आयोग ने बताया कि 2021 के पिछले आम चुनावों की तुलना में इस बार जब्ती की मात्रा में 40.14 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है। 2021 में यह राशि 1029.93 करोड़ रुपये थी। यह वृद्धि आयोग की सख्त निगरानी और तकनीकी प्लेटफार्मों के प्रभावी उपयोग को दर्शाती है।

तमिलनाडु और बंगाल में सबसे ज्यादा कार्रवाई

​जब्ती के मामले में तमिलनाडु शीर्ष पर रहा, जहाँ कुल 662.28 करोड़ रुपये की सामग्री पकड़ी गई। वहीं, पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 68.92% की वृद्धि दर्ज की गई, जहाँ 573.41 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी, शराब और अन्य सामग्री जब्त की गई।

राज्यवार कुल जब्ती का विवरण (करोड़ रुपये में):

  • तमिलनाडु: ₹662.28
  • पश्चिम बंगाल: ₹573.41
  • असम: ₹117.24
  • केरल: ₹80.67
  • पुडुचेरी: ₹9.72

शराब और नशीले पदार्थों पर लगाम

​आंकड़ों के मुताबिक, पूरे चुनाव अभियान के दौरान लगभग 70 लाख लीटर शराब जब्त की गई, जिसकी कीमत 183.33 करोड़ रुपये है। इसके अलावा 337.88 करोड़ रुपये के मादक पदार्थ (ड्रग्स) और 250.14 करोड़ रुपये मूल्य की बहुमूल्य धातुएं भी पकड़ी गईं।

तकनीक और निगरानी का तालमेल

​इस विशाल कार्रवाई को सफल बनाने में ‘चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली’ (ESMS) नामक आईटी प्लेटफॉर्म ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके माध्यम से विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के बीच रीयल-टाइम सूचना साझा की गई। चुनाव प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए:

  • 376 व्यय पर्यवेक्षक तैनात किए गए थे।
  • 7,470 फ्लाइंग स्क्वाड टीमें (FST) और इतनी ही संख्या में स्थैतिक निगरानी टीमें (SST) दिन-रात सक्रिय रहीं।

​आयोग ने स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर, अन्य सभी चुनावी क्षेत्रों से अब आदर्श आचार संहिता (MCC) हटा ली गई है। यह कार्रवाई लोकतंत्र में धनबल और बाहुबल के प्रभाव को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

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