औरंगाबाद: ‘ज्ञान भारतम् मिशन’ के तहत संरक्षित होंगी प्राचीन पांडुलिपियाँ, जिले में 9000 दस्तावेजों की हुई पहचान
Magadh Express:भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक विरासतों को सहेजने के लिए बिहार सरकार ने “ज्ञान भारतम् मिशन” के तहत एक बड़ी पहल शुरू की है। सोमवार को मुख्य सचिव, बिहार की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिले में पांडुलिपियों के संरक्षण और उनके डिजिटाइजेशन कार्य की विस्तृत समीक्षा की गई।
इस महत्वपूर्ण बैठक में औरंगाबाद समाहरणालय से जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा, उप विकास आयुक्त श्रीमती अनन्या सिंह, अपर समाहर्ता श्री अनुग्रह नारायण सिंह सहित अन्य जिला स्तरीय अधिकारी डिजिटल माध्यम से जुड़े रहे।

क्या है ज्ञान भारतम् मिशन?
इस मिशन के तहत 75 वर्ष या उससे अधिक पुराने हस्तलिखित दस्तावेजों का डिजिटाइजेशन किया जा रहा है। इसमें कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़ा या धातु पर लिखी गई प्राचीन सामग्रियां शामिल हैं। इसका मुख्य उद्देश्य प्राचीन ग्रंथों में निहित ज्ञान को सुरक्षित रखना और उसे शोध व अनुवाद के माध्यम से वैश्विक स्तर पर प्रसारित करना है।
जिले में अब तक की प्रगति
- दस्तावेजों की पहचान: औरंगाबाद जिले में अब तक लगभग 9000 हस्तलिखित दस्तावेजों की पहचान की जा चुकी है।
- भौतिक सत्यापन: सर्वेक्षण के बाद विशेषज्ञों की टीम इन स्थलों का दौरा कर पांडुलिपियों के वैज्ञानिक उपचार और संरक्षण की प्रक्रिया शुरू करेगी।
- समय सीमा: मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि सर्वेक्षण का कार्य पूरी शुद्धता के साथ 15 जून 2026 तक अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए।

स्वामित्व रहेगा सुरक्षित, आम जन से सहयोग की अपील
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिजिटाइजेशन के बाद भी पांडुलिपियों का मूल स्वामित्व संबंधित व्यक्ति या संस्था के पास ही रहेगा। प्रशासन ने सभी जिलावासियों से अपील की है कि यदि उनके पास 75 वर्ष से अधिक पुराने प्राचीन दस्तावेज उपलब्ध हैं, तो वे उनके संरक्षण के लिए जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी श्री कुमार पप्पू राज (मोबाइल: 7488153690) से संपर्क कर सकते हैं।
जिलाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने कहा कि यह अभियान हमारी अमूल्य सांस्कृतिक धरोहरों को क्षरण से बचाने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।