पत्नी की ‘जान’ ले बैठा ‘झोलाछाप’ पति का अहंकार: इलाज के नाम पर करता रहा खिलवाड़, मौत के बाद लाश छोड़कर भागे ससुराल वाले

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औरंगाबाद (विशेष रिपोर्ट):

एक सुहागन के हाथों की मेहंदी का रंग अभी ठीक से फीका भी नहीं पड़ा था कि उसके सपनों का अंत हो गया। मामला औरंगाबाद का है, जहां एक 21 वर्षीय नवविवाहिता आरती कुमारी की मौत प्रसव पीड़ा के दौरान हो गई। लेकिन यह महज़ एक मौत नहीं, बल्कि लापरवाही और बेरुखी की एक खौफनाक दास्तां है। आरोप है कि पति ने अपनी पत्नी को ‘जीवनसंगिनी’ समझने के बजाय, अपनी डॉक्टरी के अधकचरे ज्ञान का ‘प्रयोगशाला’ बना दिया।

नीम-हकीम खतरे-ए-जान: पति ही बन गया काल

कुटुंबा थाना क्षेत्र के बर्मा गांव का रहने वाला शैलेश कुमार, जो खुद को ग्रामीण चिकित्सक (झोलाछाप डॉक्टर) बताता है, अपनी पत्नी आरती की जान का दुश्मन बन गया।

मृतका की मां शोभा देवी के आंसुओं में लिपटा बयान दिल दहला देने वाला है। उनका कहना है कि शैलेश ने गर्भावस्था के दौरान आरती को किसी भी बड़े अस्पताल या विशेषज्ञ डॉक्टर को दिखाने के बजाय घर पर ही उसका इलाज किया। जब भी रूटीन चेकअप की बात आती, वह अपनी ‘डॉक्टरी’ झाड़कर बात टाल देता। नतीजा यह हुआ कि शुक्रवार की रात जब आरती को असहनीय प्रसव पीड़ा हुई, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

अस्पताल में लाश वारिस, ससुराल वाले फरार

शुक्रवार की रात जब आरती की हालत बिगड़ी, तो आनन-फानन में उसे रेफरल अस्पताल कुटुंबा और फिर वहां से सदर अस्पताल औरंगाबाद ले जाया गया। लेकिन तब तक सांसे साथ छोड़ चुकी थीं।

हैरान कर देने वाला मंजर तब सामने आया जब आरती की मौत की खबर मिलते ही उसके मायके वाले (रघुनाथपुर, नवीनगर) बदहवास हालत में अस्पताल पहुंचे। वहां आरती का बेजान शरीर पड़ा था, लेकिन उसे कंधा देने वाला पति और ससुराल का कोई भी शख्स मौजूद नहीं था। वे सभी पुलिस के डर और जिम्मेदारी से बचने के लिए शव को लावारिस छोड़कर फरार हो चुके थे।

दहेज की आग और बाइक की किस्त

इस त्रासदी के पीछे सिर्फ मेडिकल लापरवाही नहीं, बल्कि दहेज का लोभ भी छिपा था। 2024 में हुई शादी में मायके वालों ने हैसियत से बढ़कर दान-दहेज दिया था। यहां तक कि एक बाइक भी फाइनेंस कराई गई, जिसकी किस्तें मायके वाले ही भर रहे थे।

आरोप है कि जब आर्थिक तंगी के कारण एक किस्त नहीं भरी जा सकी और फाइनेंस वाले घर पहुंचे, तो शैलेश का पुरुषार्थ जाग गया। उसने शराब के नशे में आरती को पीटना शुरू कर दिया। ताने, मारपीट और प्रताड़ना आरती की रोजमर्रा की जिंदगी बन गई थी। एक बार समझौता हुआ, सब ठीक होने का दिलासा दिया गया, लेकिन अंत वही हुआ जिसका डर था।

पुलिस की तफ्तीश जारी

सदर अस्पताल पहुंची नगर थाना की पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया है। वहीं, कुटुंबा थानाध्यक्ष इमरान अली ने बताया कि मामले की जानकारी मिली है, लेकिन मौत की असल वजह जांच के बाद ही साफ होगी। मायके वालों के आवेदन का इंतजार है, जिसके बाद कानून अपना काम करेगा।

सवाल अब भी जिंदा है…

एक झोलाछाप पति की जिद और दहेज के लोभ ने एक बेटी की जान ले ली। क्या आरती को न्याय मिल पाएगा? या फिर यह फाइल भी सरकारी दफ्तरों में धूल फांकती रह जाएगी?

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