बिहार चुनाव 2025: नीतीश कुमार की सीएम उम्मीदवारी पर बीजेपी की ‘कैच-22’ दुविधा, लेकिन नेतृत्व ने दिया भरोसा
पटना, 31 अक्टूबर 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मियों के बीच राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने आज अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सीएम फेस के रूप में मजबूती से पेश किया। भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कहा, “नीतीश कुमार वर्तमान में मुख्यमंत्री हैं और आगे भी रहेंगे।” लेकिन क्या यह घोषणा-पत्र वाकई नीतीश की उम्मीदवारी को औपचारिक मुहर दे पाएगा, या बीजेपी की आंतरिक दुविधा चुनावी समीकरण बदल देगी? विपक्ष इसे ‘पलटीमार नीतीश’ का मुद्दा बना रहा है, जबकि एनडीए इसे ‘सुशासन का गारंटी’ बता रहा।
घोषणा-पत्र लॉन्च: नीतीश की मौजूदगी से मजबूत संदेश
पटना के होटल मौर्या में आज जारी हुए एनडीए के संकल्प पत्र में 1 करोड़ नौकरियां, ‘लखपति दीदी’ योजना और इंफ्रा विकास जैसे वादों के बीच नीतीश कुमार की भूमिका केंद्रीय रही। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य नेताओं के साथ मंच पर मौजूद नीतीश को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने शॉल ओढ़ाकर स्वागत किया, जो गठबंधन की एकजुटता का प्रतीक था। सम्राट चौधरी ने मीडिया से बातचीत में नीतीश की उम्मीदवारी पर कहा, “नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं और आगे भी रहेंगे।” यह बयान तेजस्वी यादव के सीएम दावे के जवाब में आया, जो महागठबंधन की रणनीति को काउंटर करने का प्रयास लगता है।
एनडीए इसे ‘नीतीश के नेतृत्व में विकसित बिहार’ का रोडमैप बता रहा है। जेडीयू के कोर वोटरों को भरोसा दिलाने के लिए यह कदम रणनीतिक है, क्योंकि 2020 के चुनावों में नीतीश के बिना एनडीए का प्रदर्शन कमजोर पड़ गया था।
राजनीतिक विश्लेषण: बीजेपी की दुविधा—अपना वोटर vs नीतीश का समर्थन
नीतीश कुमार की सीएम उम्मीदवारी पर बहस लंबे समय से चल रही है, और आज के घटनाक्रम ने इसे और तेज कर दिया। पत्रकार मनोज मुकुल के विश्लेषण के मुताबिक, बीजेपी के लिए यह ‘कैच-22’ वाली स्थिति है। एक तरफ, बीजेपी का कोर वोटर (खासकर ऊपरी जातियां) 2015 से अपना सीएम चाहता रहा है। अगर नीतीश का नाम औपचारिक रूप से घोषित हो गया, तो यह वोट बैंक नाराज हो सकता है, जो प्रशांत किशोर जैसे रणनीतिकारों के निशाने पर है। दूसरी तरफ, अगर घोषणा न हुई, तो नीतीश के वोटर (ईबीसी-ओबीसी) उदासीन हो सकते हैं, जो एनडीए के लिए घातक साबित होगा।
बीजेपी नेताओं के बयानों से साफ है कि वे ‘टुकड़ों-टुकड़ों’ में नीतीश को सपोर्ट कर रहे हैं—औपचारिक ऐलान टालकर। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव नजदीक आते ही (पहला चरण 6 नवंबर से) शीर्ष नेतृत्व नीतीश का नाम पक्का कर देगा, क्योंकि उनके बिना एनडीए का वोट शेयर 10-15% गिर सकता है। अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने भी नीतीश की उम्मीदवारी पर तंज कसा, बिहार में ‘बदलाव की मांग’ बताते हुए बीजेपी पर ‘षड्यंत्र’ का आरोप लगाया।
नीतीश की ‘पलटी’ वाली छवि (2013, 2015, 2017, 2022, 2024 में गठबंधन बदलना) भी मुद्दा बनी हुई है। वे खुद बार-बार कह चुके हैं कि ‘अब पाला नहीं बदलेंगे’, लेकिन विपक्ष इसे ‘सुशासन बाबू’ से ‘पलटीमार’ का सफर बता रहा। एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण अब महिला-युवा पर शिफ्ट हो चुका है, जहां नीतीश का फैक्टर निर्णायक साबित हो सकता है।
विपक्ष का पलटवार: ‘नीतीश की उम्मीदवारी पर सवाल’
महागठबंधन ने नीतीश की उम्मीदवारी को कमजोर करने की कोशिश की। तेजस्वी यादव ने संकल्प पत्र को ‘सॉरी पत्र’ कहा, और नीतीश पर तंज कसते हुए पूछा कि क्या बीजेपी उन्हें फिर ‘धोखा’ देगी। कांग्रेस और आरजेडी इसे ‘नीतीश की मजबूरी’ बता रहे हैं, जबकि प्रगतिशील किशोर (पीके) जैसे स्वतंत्र रणनीतिकार बीजेपी के ‘अपना सीएम’ वोट पर नजर रखे हैं। सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी हुई है, जहां यूजर्स नीतीश vs तेजस्वी की तुलना कर रहे हैं।
निष्कर्ष: उम्मीदवारी तय करेगी चुनावी दिशा
31 अक्टूबर 2025 को जारी संकल्प पत्र ने नीतीश कुमार की सीएम उम्मीदवारी को मजबूती दी है, लेकिन बीजेपी की दुविधा बरकरार है। अगर औपचारिक ऐलान हुआ, तो एनडीए मजबूत होगा; वरना महागठबंधन को फायदा। बिहार की 60% युवा आबादी और महिलाओं के वोट निर्णायक होंगे—क्या ‘सुशासन’ की वापसी होगी, या ‘परिवर्तन’ का दौर? जनता का फैसला ही अंतिम होगा।
