कुटुंबा (औरंगाबाद) का चुनावी महाभारत: क्या राजेश राम लगाएंगे जीत की हैट्रिक या ललन भुइयां करेंगे वापसी?कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अपनी सीट बचा पाएंगे या एनडीए की नई रणनीति इस महामुकाबले में कांग्रेस के खेल को बिगाड़ेगी

0
1000658989


Magadh Express:औरंगाबाद जिले की कुटुंबा (अनुसूचित जाति सुरक्षित) विधानसभा सीट पर इस बार बिहार विधानसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प और कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। यह मुकाबला सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच का नहीं है, बल्कि यह कांग्रेस (महागठबंधन) के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम की व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और एनडीए की इस मजबूत सीट को छीनने की ज़ोरदार कोशिश के बीच का है।


राजेश राम पिछले दो चुनावों (2015 और 2020) में लगातार जीत दर्ज कर चुके हैं, और अब वह जीत की हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में हैं। वहीं, एनडीए ने अपनी रणनीति बदलते हुए, 2010 के विजेता ललन भुइयां (ललन राम) पर दांव लगाया है, जो हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के टिकट पर चुनावी रण में उतरे हैं।


प्रतिष्ठा का प्रश्न: राजेश राम के सामने कड़ी चुनौती
कांग्रेस के टिकट पर लगातार दो बार जीतना और अब बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभालना, राजेश राम को इस क्षेत्र का एक बड़ा नेता बनाता है।

  • 2020 का प्रदर्शन: 2020 के विधानसभा चुनाव में, राजेश राम ने ‘हम’ (HAM) के उम्मीदवार श्रवण भुइयां को 16,653 वोटों के एक बड़े अंतर से हराया था। उन्हें कुल 50,822 वोट मिले थे, जो कुल मतों का लगभग 36.6% था।
  • विकास और जनाधार: उनके समर्थक उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों और स्थानीय लोगों के बीच उनकी मजबूत पकड़ को जीत का आधार मानते हैं। महागठबंधन का संगठित वोट बैंक उनके लिए एक बड़ा संबल है।
    एनडीए की नई चाल: ललन भुइयां की वापसी की तैयारी
    एनडीए गठबंधन ने इस बार पिछली हार को देखते हुए, श्रवण भुइयां की जगह ललन भुइयां (ललन राम) को उम्मीदवार बनाया है। ललन भुइयां का इतिहास इस सीट पर मजबूत रहा है:
  • 2010 की जीत: वह 2010 में जेडीयू के टिकट पर इसी सीट से जीत दर्ज कर चुके हैं, जो उनके अनुभव और स्थानीय पहचान को दर्शाता है।
  • नई उम्मीद: एनडीए का मानना है कि ललन भुइयां की व्यक्तिगत पकड़ और बीजेपी-जेडीयू-हम के संयुक्त वोट बैंक से कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाई जा सकती है। 2020 में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने मतदान नहीं किया था (मतदान प्रतिशत लगभग 52% था), जिसे सक्रिय करने का लक्ष्य एनडीए का है।
    जातीय समीकरण: निर्णायक कौन?
    यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, जहां के राजनीतिक समीकरण काफी जटिल हैं:
  • रविदास/भुइयां वोट: इस क्षेत्र में रविदास समुदाय के मतदाताओं की संख्या सर्वाधिक है और यही वर्ग दोनों प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला करेगा। ‘हम’ (HAM) दलित राजनीति की ही पार्टी है, जबकि राजेश राम कांग्रेस के कद्दावर दलित नेता हैं।
  • अन्य निर्णायक समूह: रविदास के अलावा, राजपूत समाज के मतदाताओं की भूमिका भी चुनाव परिणाम को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण मानी जाती है।
    निष्कर्ष
    कुटुंबा का यह मुकाबला मौजूदा विधायक की हैट्रिक और पुरानी जीत को दोहराने की कोशिश के बीच है। राजेश राम जहां अपनी व्यक्तिगत छवि और प्रदेश अध्यक्ष के पद से मिली ताकत पर निर्भर हैं, वहीं ललन भुइयां एनडीए की संगठित शक्ति और अपने पुराने जनाधार के सहारे मैदान में हैं।यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अपनी सीट बचा पाएंगे या एनडीए की नई रणनीति इस महामुकाबले में सफल होकर कांग्रेस के खेल को बिगाड़ देगी।

  • मतदान की तारीख: 11 नवंबर 2025 (दूसरे चरण में)
    मतगणना: 14 नवंबर 2025

Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed