औरंगाबाद :ओबरा विधानसभा, क्या जातिवाद का बंधन तोड़ प्रकाश चंद्रा बदलेंगे चुनावी गणित?क्या टूटेगा ‘महागठबंधन’ का तिलिस्म?

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Magadh Express: औरंगाबाद जिले के ओबरा विधानसभा सीट, जो पारंपरिक रूप से जातीय समीकरणों और महागठबंधन का गढ़ मानी जाती रही है, इस बार एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के उम्मीदवार प्रकाश चंद्रा अपनी चुनावी रणनीति में जाति-आधारित राजनीति से ऊपर उठकर, सभी वर्गों को साथ लाने और विकास के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने का दावा कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या उनका यह प्रयास ओबरा के दशकों पुराने चुनावी गणित को बदलने में सफल होगा?


चुनौतीपूर्ण चुनावी इतिहास
ओबरा विधानसभा का इतिहास बताता है कि यहां की राजनीति में जातीय समीकरणों का हमेशा से गहरा प्रभाव रहा है। यह सीट अक्सर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और वाम दलों के दबदबे वाली रही है। 2020 के पिछले चुनाव में भी, RJD के ऋषि कुमार ने प्रकाश चंद्रा को भारी अंतर से हराया था, जबकि JDU और RLSP के उम्मीदवार भी मुकाबले में थे। क्षेत्र में अति पिछड़ा, भूमिहार, राजपूत और अनुसूचित जाति की अच्छी खासी जनसंख्या है, जिसके कारण हर चुनाव में दलों को जातीय संतुलन साधने की कोशिश करनी पड़ती है।


प्रकाश चंद्रा की ‘जाति-मुक्त’ रणनीति
प्रकाश चंद्रा, जो खुद को ‘जनसेवक’ के तौर पर पेश करते हैं, लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि वह किसी एक जाति नहीं, बल्कि पूरे ओबरा विधानसभा का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। उनका दावा है कि उन्होंने 5 साल तक क्षेत्र की सेवा की है, भले ही वह चुनाव नहीं जीते थे, और अब लोग जाति-पाती से ऊपर उठकर उनके साथ व्यक्तिगत रूप से जुड़ रहे हैं।

उम्मीदवार का दावा: “इस बार जाति पाती से ऊपर उठकर के सभी जाति सभी वर्ग के लोग और सभी समीकरण के लोग हमारे साथ जुड़ेंगे और इस बार ओबरा की जनता चुनाव जीतेगी।”

चंद्रा, जो एनडीए का हिस्सा हैं (इस बार लोजपा रामविलास के टिकट पर), लोगों से जातीय घृणा को खत्म करने और विकास के लिए वोट देने की अपील कर रहे हैं। वह बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल स्थिति जैसे स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता दे रहे हैं।


क्या टूटेगा ‘महागठबंधन’ का तिलिस्म?
ओबरा में RJD और उसके सहयोगी दलों का मजबूत आधार रहा है। चंद्रा का जातिवाद को दरकिनार कर विकास की बात करना एक जोखिम भरी लेकिन साहसिक चाल है। यदि वह विभिन्न जातियों और वर्गों के मतदाताओं को अपने पक्ष में लामबंद करने में सफल होते हैं, खासकर उन वोटरों को जो पारंपरिक रूप से RJD के साथ नहीं हैं, तो वह निश्चित रूप से चुनावी समीकरण को चुनौतीपूर्ण बना सकते हैं।
हालांकि, ओबरा में जातीय गोलबंदी की जड़ें गहरी हैं। प्रकाश चंद्रा को न सिर्फ अपने प्रतिद्वंद्वी के मजबूत जनाधार से लड़ना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि उनकी ‘जाति-मुक्त’ अपील सिर्फ नारा न बनकर, वास्तविक वोटों में तब्दील हो। इस बार का चुनाव यह तय करेगा कि ओबरा की जनता पारंपरिक जातीय बंधनों को तोड़कर विकास और व्यक्तिगत साख को कितना महत्व देती है।

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