संघ पृष्ठभूमि, दक्षिण का चेहरा: सी.पी. राधाकृष्णन बने देश के 15वें उपराष्ट्रपति, विपक्ष ने याद दिलाई संवैधानिक मर्यादा

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नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले और अपनी सौम्य छवि के लिए पहचाने जाने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता सी.पी. राधाकृष्णन देश के 15वें उपराष्ट्रपति चुने गए हैं। मंगलवार को हुए चुनाव में उन्होंने एनडीए उम्मीदवार के तौर पर विपक्ष के साझा प्रत्याशी बी. सुदर्शन रेड्डी को 152 वोटों के भारी अंतर से हराया। राधाकृष्णन को कुल 452 वोट मिले, जबकि रेड्डी के पक्ष में 300 वोट पड़े।

​उनकी जीत के साथ ही सत्ता पक्ष में जश्न का माहौल है, वहीं विपक्ष ने उन्हें बधाई देते हुए संवैधानिक जिम्मेदारियों और निष्पक्षता की याद दिलाई है।

​67 वर्षीय राधाकृष्णन, जगदीप धनखड़ का स्थान लेंगे, जिन्होंने मानसून सत्र के पहले ही दिन अप्रत्याशित रूप से इस्तीफा दे दिया था। राधाकृष्णन की इस जीत को भाजपा की दक्षिण भारत में अपनी पैठ मजबूत करने की रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। वह तमिलनाडु से आने वाले तीसरे नेता हैं जो इस प्रतिष्ठित पद पर आसीन हुए हैं।

प्रधानमंत्री से लेकर गृह मंत्री तक ने दी बधाई

​जीत की घोषणा के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर उन्हें बधाई दी। उन्होंने लिखा, “उनका जीवन हमेशा समाज की सेवा और गरीबों व वंचितों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित रहा है। मुझे विश्वास है कि वह एक उत्कृष्ट उपराष्ट्रपति होंगे, जो हमारे संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करेंगे और संसदीय संवाद को बढ़ाएंगे।”

​गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें बधाई देते हुए कहा, “मुझे दृढ़ विश्वास है कि जमीनी स्तर से उठे एक नेता के रूप में आपकी बुद्धिमत्ता और प्रशासन के बारे में आपका गहरा ज्ञान हमारी संसदीय लोकतंत्र में सर्वश्रेष्ठ लाने में मदद करेगा ताकि हाशिए पर मौजूद लोगों की सेवा की जा सके।”

​एनडीए के सहयोगी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

विपक्ष का सधा हुआ निशाना, उठाए पुराने सवाल

​कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राधाकृष्णन को जीत की बधाई दी, लेकिन साथ ही एक बड़ा मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा, “यह चुनाव एक संस्था से बढ़कर था; यह विचारधारा की लड़ाई थी। हम उम्मीद करते हैं कि नए उपराष्ट्रपति संसदीय परंपराओं के उच्चतम लोकाचार को बनाए रखेंगे और विपक्ष को समान स्थान और सम्मान सुनिश्चित करेंगे।”

​खड़गे ने पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा, “हमें यह भी याद रखना चाहिए कि इस चुनाव की आवश्यकता क्यों पड़ी। श्री जगदीप धनखड़ ने मानसून सत्र के उद्घाटन की अध्यक्षता करने वाले दिन ही अचानक इस्तीफा दे दिया—एक ऐसी विदाई जो अभी भी अस्पष्ट और अशोभनीय है।”

कौन हैं ‘सच्चे तमिल’ सी.पी. राधाकृष्णन?

​उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकित होने से पहले महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में कार्यरत सी.पी. राधाकृष्णन को उनके समर्थक ‘पचई तमिझन’ (सच्चे तमिल) के नाम से जानते हैं। कोयंबटूर से दो बार सांसद रह चुके राधाकृष्णन अपनी मिलनसार और गैर-टकराव वाली कार्यशैली के लिए प्रसिद्ध हैं। अब राज्यसभा के सभापति के रूप में, उनकी यह शैली सदन के सुचारू संचालन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी, जहाँ विपक्ष अक्सर सरकार पर हमलावर रहता है।

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