Aurangabad,पुलिस ने पकड़ी स्प्रिट तस्करी की हैरान करने वाली गाड़ी, 7 गिरफ्तार
संजीव कुमार
Aurangabad – मदनपुर पुलिस ने एक बड़े स्प्रिट तस्करी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए एक स्कॉर्पियो से 520 लीटर स्प्रिट जब्त की है। इस मामले में पुलिस ने 4 महिलाओं समेत 7 तस्करों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में मां-बेटी की दो जोड़ियां भी शामिल हैं।
मदनपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो (नंबर BR24AK-6287) झारखंड के हरिहरगंज से इमामगंज होते हुए शेरघाटी एनएच-19 के रास्ते औरंगाबाद जा रही है। गाड़ी में 40-40 लीटर वाले 13 गैलेन में स्प्रिट छिपाकर रखा गया था। पुलिस ने पीछा करते हुए वर्षा पेट्रोल पंप के पास गाड़ी को रोककर सभी तस्करों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस की पूछताछ में तस्करों ने बताया कि वे यात्रियों का रूप धारण करके स्प्रिट की तस्करी करते थे ताकि पुलिस को शक न हो। इस काम के लिए पुरुष तस्करों को प्रति खेप 2,500 रुपये, महिला तस्करों को 700 रुपये और ड्राइवर को 5,000 रुपये मिलते थे। पुलिस ने गाड़ी के बीच वाले हिस्से से 5 गैलेन और पिछले हिस्से से 8 गैलेन स्प्रिट बरामद किया।
गिरफ्तार किए गए लोगों में रोहतास और डेहरी के रहने वाले कई लोग शामिल हैं। पुलिस ने इस मामले में हरिहरगंज के एक व्यक्ति को भी अभियुक्त बनाया है। पुलिस ने सभी आरोपियों को जेल भेज दिया है।
शराबबंदी की चुनौतियों और अवैध व्यापार का बढ़ता खतरा
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब तस्करी के ऐसे मामले सरकार की सख्ती पर सवाल खड़े करते हैं। यह घटना दिखाती है कि शराब तस्कर नए-नए तरीकों से कानून को चुनौती दे रहे हैं।
शराबबंदी ने राज्य में एक नया अवैध व्यापार खड़ा कर दिया है, जो बेहद मुनाफे वाला बन गया है। तस्कर कम समय में ज्यादा पैसा कमाने के लालच में इस धंधे में उतर रहे हैं। इससे संगठित अपराध को भी बढ़ावा मिल रहा है, क्योंकि बड़े गिरोह इस अवैध कारोबार को चला रहे हैं। तस्करी के तरीकों में महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल भी एक चिंताजनक पहलू है।
शराबबंदी का उद्देश्य राज्य में अपराध कम करना था, लेकिन अवैध शराब का कारोबार बढ़ने से कई तरह की सामाजिक और आपराधिक समस्याएं पैदा हो रही हैं। जहरीली शराब पीने से लोगों की मौत की घटनाएं भी इसी अवैध कारोबार का दुखद नतीजा हैं। पुलिस और प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि तस्कर हर दिन नए तरीके खोज रहे हैं। इस समस्या से निपटने के लिए सिर्फ सख्ती ही नहीं, बल्कि प्रभावी रणनीति और लोगों में जागरूकता की भी ज़रूरत है।