सवाल – कर्मचारियों को सवाल पूछने पर SC/ST एक्ट का अधिकार मिला तो बिहार में कामकाज कैसे चलेगा?

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पटना: बिहार में राजद विधायक भाई वीरेंद्र पर एक पंचायत सचिव द्वारा SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद, राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में एक गंभीर बहस छिड़ गई है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद नहीं, बल्कि एक बड़े सवाल को जन्म दे रही है: यदि सरकारी कर्मचारियों को सवाल पूछने या कामकाज पर टिप्पणी करने वाले जनप्रतिनिधियों पर SC/ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराने का अधिकार मिल जाएगा, तो बिहार में शासन-प्रशासन कैसे चलेगा?

​मामला मनेर विधायक भाई वीरेंद्र से जुड़ा है, जिन पर पंचायत सचिव ने SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराया है। यह कार्रवाई एक वायरल वीडियो के बाद हुई है, जिसमें विधायक और पंचायत सचिव के बीच तीखी नोकझोंक दिख रही है। इस घटना ने एक बार फिर SC/ST एक्ट के संभावित दुरुपयोग पर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

​विरोधियों और कुछ प्रशासनिक विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि छोटी-मोटी नोकझोंक या कामकाज से जुड़े सवालों पर भी एक्ट का इस्तेमाल होने लगेगा, तो जनप्रतिनिधि कर्मचारियों से सवाल पूछने और उनकी जवाबदेही तय करने में हिचकिचाएंगे। इसका सीधा असर जनता के काम पर पड़ेगा, क्योंकि अधिकारी बेखौफ होकर काम करेंगे और उनकी जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाएगा।

​यह भी ध्यान देने योग्य है कि RJD, जिसकी भाई वीरेंद्र एक विधायक हैं, हमेशा से SC/ST एक्ट की प्रबल समर्थक रही है। ऐसे में अपनी ही पार्टी के विधायक पर इस एक्ट के तहत कार्रवाई होना, पार्टी के लिए भी असहज स्थिति पैदा कर रहा है।

​सवाल यह भी उठता है कि क्या पंचायत सचिव जैसे निचले स्तर के कर्मचारी को एक विधायक के प्रोटोकॉल और पद की गरिमा का ध्यान नहीं रखना चाहिए था? और क्या यह पूरी घटना सिर्फ एक गलतफहमी या किसी व्यक्तिगत खुन्नस का नतीजा है, जिसे SC/ST एक्ट की आड़ में राजनीतिक रंग दिया जा रहा है?

​विशेषज्ञों का कहना है कि SC/ST एक्ट का मूल उद्देश्य दलितों और आदिवासियों के खिलाफ होने वाले अत्याचारों को रोकना और उन्हें न्याय दिलाना है। यह एक महत्वपूर्ण कानून है, लेकिन इसका दुरुपयोग किसी भी तरह से स्वीकार्य नहीं होना चाहिए। यदि इस तरह के मामलों में बिना पर्याप्त सबूतों और जांच के आधार पर तुरंत FIR दर्ज की जाती रहेगी, तो यह एक्ट अपनी विश्वसनीयता खो सकता है और समाज में अनावश्यक तनाव पैदा कर सकता है।

​फिलहाल, इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बिहार सरकार और प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वे इस एक्ट के सही उपयोग को सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि राज्य में सुशासन और जवाबदेही का माहौल बना रहे।

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