सावन मे मटुक भैरव का है विशेष महत्व,कम साधना से करने मात्र से पूर्ण होती है सारे मनोकामनायें
संजीव कुमार
-सावन का पवित्र महीना भगवान भोले शंकर के लिए प्रिय माना जाता है.इस महीने मे भगवान शिव के ऊपर बेलपत्र एवं गंगा जल चढ़ाने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है.प्रखंड मुख्यालय से तीन किलोमीटर दक्षिण दिशा मे ऐतिहासिक उमगा पर्वत है.धार्मिक दृष्टिकोण से इस पर्वत का विशेष महत्व है.इस पर 52 देवी देवताओं का मंदिर है इसलिए 52 देवताओं का शक्तिपीठ कहा जाता है.सावन महीने मे यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है.लोग दूर दूर से पूजा अर्चना कर मन्नते मांगने के लिए यहाँ आते हैँ.उमगा पर्वत के दक्षिण मे भगवान शिव का स्वरूप मटुक भैरव का मंदिर स्थित है.जहाँ सावन के महीने मे भक्त पूजा अर्चना करते हैँ.

मुख्य पुजारी बालमुकुंदानंद पाठक एवं नीरज पाठक के अनुसार मटुक भैरव का वास्तविक नाम बटुक भैरव है.जिसे देवी का दूत भी कहा जाता है.देवी के तीन दूत हैँ – काल भैरव,राज भैरव एवं बटुक भैरव.तीनो भैरव भगवान भोले शंकर का स्वरूप है.प्राचीन मान्यता के अनुसार तीनो का अपना विशेष महत्व होता है.बटुक भैरव वह स्वरूप हैँ जहाँ पर कम साधना करने मात्र से ही भगवान शिव प्रसन्न होते हैँ और भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है।
प्राचीन काल मे साधक इसे जानते थे लेकिन,तत्कालीन समय मे बालूराम नाम के एक सेठ माड़वाड़ी थे.जो सावन के महीना मे प्रतिदिन बटुक भैरव मंदिर मे जाकर बेल पत्र चढ़ाते थे और गंगाजल से जलाभिषेक करते थे.विशेष कर सावन मास के प्रत्येक सोमवार को वहां पूजा अर्चना कर भक्तों मे प्रसाद का वितरण करते थे.मान्यता के अनुसार बटुक भैरव के पूजन करने से भक्तों के हर रोग का नाश होता है,लोग दीर्घायु बनते हैँ और हर मनोकामनाएं पूर्ण होती है.