औरंगाबाद: निजी क्लीनिकों की मनमानी से स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल, प्रशासन मौन
औरंगाबाद : औरंगाबाद जिले में अवैध रूप से चल रहे निजी क्लीनिकों में अप्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे सिजेरियन ऑपरेशन और लापरवाही के कारण हो रही मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में हुई एक घटना ने एक बार फिर इन तथाकथित ‘कुकुरमुत्ते’ की तरह फैले क्लीनिकों और प्रशासन की निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गयाजी के आंती गांव निवासी और वर्तमान में भाम बिरनावां गांव निवासी नागेंद्र यादव की पत्नी सोनी (30) को रविवार शाम प्रसव पीड़ा के बाद औरंगाबाद के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सोमवार सुबह डॉक्टरों ने उसका ऑपरेशन किया, लेकिन ऑपरेशन के दौरान नस कटने से अत्यधिक रक्तस्राव हो गया। डॉक्टरों ने मरीज को रेफर करने की बात कहकर खून की व्यवस्था करने को कहा, और इसी दौरान महिला की मौत हो गई।
महिला की मौत की खबर मिलते ही मायके पहरपुरा और ससुराल से बड़ी संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए और शव को अस्पताल के पास रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया और हंगामा किया, जिसके बाद अस्पताल के चिकित्सक और कर्मी फरार हो गए। गुस्साए परिजनों ने बिलारू नदी पुल पर आगजनी कर गोह-रफीगंज मार्ग को लगभग 3 घंटे तक जाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को आवागमन में भारी परेशानी हुई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घंटों की मशक्कत के बाद आवागमन बहाल कराया, लेकिन अस्पताल के पास सैकड़ों लोगों की भीड़ बनी रही।
परिजनों ने आरोप लगाया है कि नस कटने के कारण महिला की मौत हुई है। हालांकि, इस मामले में कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है। थाने के अध्यक्ष ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच समझौता होने के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए घर लेकर चले गए।
यह घटना औरंगाबाद जिले में निजी क्लीनिकों की मनमानी, अप्रशिक्षित डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे जोखिम भरे ऑपरेशन और इन पर अंकुश लगाने में जिला प्रशासन की विफलता को उजागर करती है। सूत्र बताते हैं कि ऐसे कई निजी क्लीनिक बिना उचित लाइसेंस और प्रशिक्षित स्टाफ के संचालित हो रहे हैं, और आए दिन ऐसी घटनाएं होती रहती हैं, जिन्हें बाद में पैसे के दम पर ‘समझौते’ में बदल दिया जाता है। जिला चिकित्सा पदाधिकारी से लेकर जिलाधिकारी तक इस गंभीर मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, जिसका खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। यह समय है जब प्रशासन को इन अवैध और जानलेवा क्लीनिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए और स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करनी चाहिए।