अमित शाह का सहकारिता मंत्र: 2047 तक ‘आदर्श सहकारी राज्य’ का लक्ष्य, भाई-भतीजावाद पर लगेगी लगाम

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज नई दिल्ली में ‘अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष – 2025’ के उपलक्ष्य में आयोजित ‘मंथन बैठक’ की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के सहकारिता मंत्रियों ने भाग लिया, जिसका उद्देश्य देश में सहकारिता आंदोलन को मजबूत करना, चल रही योजनाओं की समीक्षा करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना था।

नए लक्ष्य और प्रमुख पहलें:


अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना कर देश में सदियों पुराने सहकारिता के संस्कार को पुनर्जीवित किया है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में सहकारिता आंदोलन के छिन्न-भिन्न होने के पीछे तीन मुख्य कारण थे: समय पर कानूनों का न बदलना, सहकारी गतिविधियों को समय के साथ न जोड़ना और सबसे अहम, भाई-भतीजावाद के कारण होने वाली भर्तियां। उन्होंने जोर देकर कहा कि मोदी सरकार ने इन तीनों कमियों को दूर करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।

शाह ने स्पष्ट किया कि 2047 तक भारत को एक “आदर्श को-ऑपरेटिव स्टेट” बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए, उन्होंने कई महत्वपूर्ण पहलों पर जोर दिया:

त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय: यह विश्वविद्यालय हर राज्य में सहकारी प्रशिक्षण संस्थाओं को अपने साथ जोड़ेगा और सहकारिता से जुड़ी सभी भर्तियों में पारदर्शिता लाने में सहायक होगा।

राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस: इसका उपयोग यह सुनिश्चित करने के लिए किया जाएगा कि अगले 5 वर्षों में देश में कोई भी गांव ऐसा न बचे जहाँ एक भी को-ऑपरेटिव न हो।

नई राष्ट्रीय सहकारिता नीति: जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी, जो प्रत्येक राज्य की स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप होगी।

2 लाख PACS का लक्ष्य: वर्ष 2025-26 तक 2 लाख बहुउद्देशीय प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (M-PACS) की स्थापना का लक्ष्य फरवरी तक पूरा करने का निर्देश दिया गया

सहकारी बैंकों का सुदृढ़ीकरण: शहरी को-ऑपरेटिव बैंक और क्रेडिट सोसाइटियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्हें बैंकिंग एक्ट के तहत लाकर और आरबीआई द्वारा लचीला रुख अपनाकर पारदर्शिता और वित्तीय मजबूती लाई जाएगी।

प्राकृतिक खेती को बढ़ावा: सभी राज्यों के सहकारिता मंत्री अपने कृषि मंत्रियों के साथ समन्वय कर प्राकृतिक खेती को जन-जन तक पहुंचाएंगे।


श्री शाह ने कहा कि देश के 140 करोड़ लोगों के लिए रोजगार सृजन और जीडीपी/जीएसडीपी का विकास अत्यंत आवश्यक है, और सहकारिता ही छोटे-छोटे पूंजी को बड़े उपक्रम में बदलने का एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गुजरात के “को-ऑपरेशन अमंगस्ट को-ऑपरेटिव्स” मॉडल को बेहद सफल बताया।


यह ‘मंथन बैठक’ भारत में सहकारिता आंदोलन को एक नई दिशा देने और इसे 2047 तक ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक मजबूत स्तंभ बनाने की केंद्र और राज्यों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

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