नगर परिषद औरंगाबाद – किंग भी बदल रहे है , किंगमेकर भी बदल रहे है और बदल रहा औरंगाबाद

नगर परिषद औरंगाबाद के लिए अध्यक्ष उपाध्यक्ष सहित 33 पार्षद पदों के मतदान की तिथि मुकर्रर हो चुकी है । नामांकन का दौर जारी है । प्यादे भी है ,मंत्री भी और राजा भी है । नगर परिषद औरंगाबाद में लड़ाई किंग से ज्यादा किंगमेकर की है । एक ओर जहां बिहार में सत्ता का निजाम बदला है वहीं नगर परिषद औरंगाबाद में सवर्णों और यादवों को पद से बेदखल किया गया है । नगर परिषद औरंगाबाद से जो भी अध्यक्ष बनेंगे उनका बड़ा पॉलिटिकल दखल होगा । स्वाभाविक है की औरंगाबाद में पहली बार नगर परिषद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष सीधे जनता के द्वारा चुने जाएंगे और औरंगाबाद नगर परिषद क्षेत्र एक बड़ा क्षेत्र भी है जहाँ डेवलपमेंट के लिए बड़ा मद भी होगा ।
अब नगर परिषद औरंगाबाद में पर्दे के पीछे जो 15 वर्षों से खेलते आ रहे है । जिनके मुँह में खून लग चुका है वे तो है ही , उनको भी पर्दे के पीछे से हटाने वाली एक लॉबी नगर परिषद चुनाव औरंगाबाद में नजर आ रही है । जो मुख्य और पारम्परिक रूप में बीजेपी और काँग्रेस के लोग होते थे जो प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से खेलते थे लेकिन इस इस बार जदयू और आरजेडी के लोग भी लॉबिग के लिए उतर चुके है। अब सवाल ये है कि माल कौन लगाएगा ? माल शब्द से मतलब है पैसा कौन लगाएगा । ये भी औरंगाबाद में अध्यक्ष पद के लिए एक बड़ा फैक्टर होगा ।
नगर परिषद क्षेत्र से अध्यक्ष पद के सभी उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि व्यवसायिक रही है । राजनीतिक एवम समाजिक नही रही है । थोड़ा रिसर्च करने से ये पता चलता है कि इनकी भविष्य और काबलियत का सर्टिफिकेट अजय आर्ट्स जैसी कंपनी दे रही है । अब डिपेंड ये करता है कि डीटीपी ऑपरेटर इनको कितना काबिल मिला है । उम्मीदवार खुद घोषित कर रहे है कि वे योग्य कर्मठ और संघर्षशील प्रत्याशी है । पोस्टर वार ,डिजाइनर सपोर्ट, फेसबुक ऑपरेटिंग और यूट्यूब जैसे चैनलों पर इनका करिश्मा दिखना शुरू हो चुका है ।
नगर परिषद औरंगाबाद का चुनाव इस बार कई रंग लेकर आ सकता है । जहाँ my समीकरण बनने से ध्रुवीकरण हो सकता है वहीं ध्रुवीकरण का लाभ राजनैतिक रूप से बीजेपी के पाले में भी जा सकता है ।
अति पिछड़ी जातियाँ औरंगाबाद में महत्वपूर्ण है । आपको समझना ये होगा कि शहर में पूजा पाठ ,सभी तरह के धर्मिक आयोजनों का मुख्य कर्ता धर्ता ये पिछड़ी जातियां ही है और शहर की मूल आबादी भी यही है । ऐसे में जाहिर सी बात है की औरंगाबाद में बहुत कुछ बदल सकता है और शायद औरंगाबाद भी ।