औरंगाबाद: एक ही समय में दो जगहों से वेतन लेने वाले लिपिक पर गिरी गाज, तत्काल प्रभाव से निलंबित
Magadh Express:औरंगाबाद जिले में सरकारी नौकरी में रहते हुए दोहरी नौकरी और वेतन वसूली का एक बड़ा मामला सामने आया है। सिविल सर्जन कार्यालय में कार्यरत एक लिपिक द्वारा एक ही अवधि में दो भिन्न संस्थानों से वेतन प्राप्त किए जाने का मामला सही पाए जाने के बाद जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। समाहरणालय, औरंगाबाद द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
इस मामले की शुरुआत पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह द्वारा की गई शिकायत से हुई थी। उन्होंने जिला पदाधिकारी को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि सिविल सर्जन कार्यालय में पदस्थापित लिपिक कृष्ण प्रसाद वर्मा सरकारी सेवा में रहने के बावजूद दो स्थानों पर नौकरी कर रहे हैं और दोनों जगह से वेतन उठा रहे हैं।
जांच में खुली पोल
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला पदाधिकारी ने सिविल सर्जन को जांच के आदेश दिए। पहले स्तर पर सिविल सर्जन द्वारा गठित त्रि-सदस्यीय समिति ने पाया कि लिपिक के सेवा अभिलेखों में विरोधाभास है। इसके बाद मामले की गहन जांच के लिए अपर समाहर्ता (लोक शिकायत निवारण), जिला पंचायत राज पदाधिकारी और जिला कार्यक्रम प्रबंधक (सदर अस्पताल) की एक संयुक्त जांच टीम गठित की गई।
जांच टीम की रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य आए सामने:
- दोहरी नौकरी का प्रमाण: जांच में यह स्पष्ट हुआ कि कृष्ण प्रसाद वर्मा 06 जुलाई 2005 से सिविल सर्जन कार्यालय, औरंगाबाद में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं और नियमित वेतन ले रहे हैं।
- दूसरा ठिकाना: इसी दौरान वे 24 नवंबर 2008 से 12 मार्च 2017 तक भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (पूर्वी झरिया क्षेत्र) में ‘जूनियर ओवरमैन’ के पद पर भी कार्यरत रहे और वहां से भी वेतन प्राप्त किया।
- नियमों का उल्लंघन: जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट कहा कि एक ही व्यक्ति द्वारा दो नियोक्ताओं के अधीन कार्य करना और वेतन लेना ‘बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976’ के नियम-16 का सीधा उल्लंघन है।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का पालन करते हुए लिपिक को अपना पक्ष रखने के लिए ‘कारण पृच्छा’ (Show Cause) के माध्यम से पर्याप्त अवसर दिया गया था, लेकिन वे अपने बचाव में कोई संतोषजनक साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
इसके बाद, जिला पदाधिकारी ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय ‘प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, गोह’ निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार केवल जीवन-यापन भत्ता (Subsistence Allowance) ही देय होगा।
अब आगे क्या?
लिपिक के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू करने के लिए जिला प्रशासन ने अधिकारियों को नामित कर दिया है। सिविल सर्जन, औरंगाबाद को ‘संचालन पदाधिकारी’ और जिला स्थापना उप समाहर्ता को ‘उपस्थापन पदाधिकारी’ बनाया गया है। जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए और जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपी जाए।
यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो अनैतिक तरीके से दोहरी सेवा का लाभ लेने का प्रयास करते हैं।
