बिहार में फार्मासिस्ट खोल सकेंगे क्लीनिक,फार्मासिस्ट संघ में खुशी का माहौल, प्रदेश भर के 25 हजार फार्मासिस्ट की बेरोजगारी दूर होगी

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मगध एक्सप्रेस :-सूबे में अब फार्मा क्लीनिक पर फार्मासिस्ट फिजीशियन की तरह इलाज कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अस्पताल के बाहर बोर्ड पर नाम, रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ ही शैक्षणिक योग्यता लिखनी होगी। फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के प्रस्ताव के बाद केंद्र सरकार के बाद राज्य सरकार ने भी इसकी मंजूरी दे दी है। इन्हें दवाएं लिखने और मरीजों का इलाज करने का अधिकार दे दिया गया है। इससे काफी हद तक झोलाछाप डॉक्टरों से मुक्ति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।नई व्यवस्था के बाद प्रदेशभर के 25 हजार रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट को इसका लाभ मिलेगा। इनमें 5 हजार डिग्री और डिप्लोमा तो 20 हजार अनुभव आधारित फार्मासिस्ट हैं।

वर्तमान में इनमें से किसी ने मेडिकल स्टोर खोल रखा है तो कोई अन्य स्थानों पर काम कर रहा है। केंद्र सरकार की शर्तों के अनुसार फार्मा क्लीनिक खाेलने से पहले इन्हें तीन माह तक अस्पताल में प्रशिक्षण अनुभव लेना होगा। इसके बाद इन्हें प्रैक्टिस करने और मेडिसीन लिखने का हक मिल जाएगा। फिर डॉक्टर की तरह फार्मासिस्ट भी मरीजों का इलाज कर उन्हें सलाह दे सकेंगे और चिकित्सक की तरह परामर्श शुल्क भी ले सकते हैं। इसका सबसे अधिक लाभ ग्रामीण क्षेत्रों में मिलेगा। यहां ज्यादातर झोलाछाप डॉक्टर इलाज कर रहे हैं, जिन्हें सही दवाई, लोगों का मर्ज ठीक करने की सही जानकारी नहीं होती।

इन राज्यों में हो चुकी है पहल प्रैक्टिस रेग्युलेशन एक्ट 2015 पारित मान्यता के लिए नहीं हो रही थी पहल पीसीआई में रजिस्ट्रेशन अनिवार्य महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, पंजाब के बाद अब बिहार में भी फार्मासिस्ट ने रजिस्ट्रेशन और दूसरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद मरीजों का इलाज करना शुरू कर दिया है। कई ने फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किए हैं, जिन्हें जल्द अधिकार मिलने की उम्मीद है।प्रांतीय और देशभर के अलग-अलग एसोसिएशन लंबे समय से सरकार से मिलकर फार्मासिस्ट को इलाज करने की अनुमति देने की मांग कर रहे थे। सात साल पहले फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया ने फार्मासिस्ट प्रैक्टिस रेग्युलेशन एक्ट 2015 बनाकर इस प्रकार के प्रावधान की अनुशंसा की, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार करने के बाद अब बिहार सरकार भी स्वीकार कर लिया है। केंद्र सरकार से प्रदेश सरकार को भी इस आशय का पत्र जारी किया गया है, जिसमें यहां इस आदेश को लागू करने के निर्देश हैं।

बिहार स्टेट फार्मासिस्ट एसोसिएशन के निदेशक श्री शादाब अहमद चाँद का कहना है कि प्रदेश में आरएमए, आयुर्वेदिक, होम्योपैथिक, आरएमपी और इलेक्ट्रो होम्योपैथी की डिग्री के आधार पर लोग एलोपैथ की प्रैक्टिस कर रहे हैं। शासन भी इन्हें मान्यता देने की तैयारी कर रहा है, जबकि फार्मासिस्ट ही एमबीबीएस डॉक्टर के बाद एलोपैथी की दवाइयों की जानकारी रखते हैं। इसके बावजूद इस पर पहल नहीं हो रही थी। नया सिस्टम बनने के बाद फार्मासिस्ट संघ में खुशी का माहौल है। इससे प्रदेशभर के 25 हजार फार्मासिस्ट की बेरोजगारी दूर होगी। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों रहने वाले प्रदेशवासियों को भी बेहतर इलाज की सुविधाएं मिलेंगी, जो अब तक झोलाछाप डाॅक्टरों से इलाज कराते आ रहे हैं।

पीपीआर एक्ट 2015 के तहत फार्मा क्लीनिक खोलने के लिए बैचलर इन फॉर्मेसी (बी.फार्मा) / डिप्लोमा इन फार्मेसी का रजिस्ट्रेशन बिहार पीसीआई में कराना अनिवार्य है। साथ ही किसी एमबीबीएस डॉक्टर या इससे अधिक अनुभव वाले डॉक्टर के साथ तीन महीने की प्रैक्टिस जरूरी है। पूरी प्रक्रिया से रजिस्ट्रेशन होने के बाद फार्मा क्लीनिक के बोर्ड पर रजिस्ट्रेशन नंबर लिखना अनिवार्य किया गया है। इसके साथ प्राइमरी मेडिसीन के साथ आईबी फ्लूड, इंट्रा मस्कुलर, इंट्रावीनस, सबट्यूटेनिश, इंजेक्शन भी लगा सकते हैं। क्लीनिक में दवा रखने के लिए जिला ड्रग डिपार्टमेंट से पंजीयन कराना होगा।

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