औरंगाबाद: रासायनिक खाद की कालाबाजारी से किसान बेहाल, पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने डीएम को लिखा पत्र
Magadh Express:औरंगाबाद जिले में खाद की किल्लत और मनमाने दाम ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आलम यह है कि सरकारी दर से कहीं अधिक कीमतों पर खाद बेची जा रही है, जिससे खेती-किसानी पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने औरंगाबाद जिला पदाधिकारी को पत्र लिखकर खाद की कालाबाजारी पर तुरंत रोक लगाने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
क्या है पूरा मामला?
पूर्व सांसद ने अपने पत्र के माध्यम से जिला प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा है कि जिले के विभिन्न प्रखंडों में बड़े पैमाने पर रासायनिक खाद (डीएपी और यूरिया) की कालाबाजारी की जा रही है। किसानों से मिल रही शिकायतों के अनुसार, दुकानदारों द्वारा खुलेआम सरकारी दर से कहीं अधिक दाम वसूले जा रहे हैं।
सरकारी दर बनाम बाजार दर
दुकानदारों की मनमानी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि निर्धारित सरकारी मूल्य और बाजार में बिक रही कीमतों में भारी अंतर है:
| खाद का प्रकार | सरकारी दर (प्रति बोरी) | बाजार दर (प्रति बोरी) |
|---|---|---|
| डीएपी (DAP) | ₹1,350 | ₹2,200 |
| यूरिया (Urea) | ₹266 | ₹400 |
दोहरी मार झेल रहे किसान
जिले के किसान पहले ही बारिश की कमी से परेशान हैं, जिसके कारण असिंचित क्षेत्रों में खेती का कार्य बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वहीं, जिन क्षेत्रों में नहरों के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है और जहाँ रोपनी का कार्य चल रहा है, वहां खाद की किल्लत और महंगी दरों ने किसानों की मुश्किलें दोगुनी कर दी हैं। मजबूरी में किसानों को अपनी फसल बचाने के लिए अधिक दाम चुकाने पड़ रहे हैं।
पूर्व सांसद की प्रशासन से सख्त अपील
किसानों की इस विकट स्थिति को देखते हुए, पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने जिला पदाधिकारी से मांग की है कि मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल प्रभाव से संबंधित अधिकारियों को जांच के आदेश दिए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कालाबाजारी करने वाले मुनाफाखोरों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि किसानों को उचित मूल्य पर खाद मिल सके और कृषि कार्य निर्बाध रूप से संपन्न हो सके।
