उत्तर कोयल प्रोजेक्ट पर मुख्य सचिव का ‘सुपर एक्शन’: हवाई सर्वे से टटोली नब्ज, अफसरों को दो-टूक— “डेडलाइन के अंदर चाहिए रिजल्ट”
औरंगाबाद/गया। बिहार की दशकों पुरानी और सबसे महत्वाकांक्षी उत्तर कोयल जलाशय परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए राज्य सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है। बुधवार को बिहार के मुख्य सचिव ने गया और औरंगाबाद जिले की सीमाओं पर इस मेगा प्रोजेक्ट का हवाई सर्वेक्षण और स्थलीय निरीक्षण किया। मुख्य सचिव के इस औचक दौरे और कड़े रुख से जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के बीच हड़कंप मचा रहा।
आसमान से जमीनी हकीकत का मुआयना
मुख्य सचिव ने सबसे पहले औरंगाबाद के देव और मदनपुर क्षेत्रों में हवाई सर्वेक्षण किया। आसमान से नहरों की स्थिति को देखते हुए उन्होंने कई जगहों पर जल जमाव (Water-logging) पाया, जिस पर उन्होंने गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने मौके पर मौजूद जल संसाधन विभाग के आलाधिकारियों को तत्काल ‘रिवाटरिंग’ (Re-watering) की प्रक्रिया शुरू करने का कड़ा निर्देश दिया, ताकि नहरों का बहाव सुचारू हो सके।
आमस बॉर्डर पर निर्माण कार्य की समीक्षा
हवाई सर्वे के बाद मुख्य सचिव का काफिला गया और औरंगाबाद की सीमा पर स्थित आमस क्षेत्र पहुँचा। यहाँ उन्होंने निर्माण स्थल पर जाकर भौतिक प्रगति (Physical Progress) की जांच की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि इस परियोजना में अब और देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने काम में अपेक्षित तेजी लाने और संसाधनों को बढ़ाने का आदेश दिया।
रफीगंज में भूमि अधिग्रहण का पेंच सुलझाने का निर्देश
परियोजना के रास्ते में आ रही सबसे बड़ी बाधा यानी ‘भूमि अधिग्रहण’ पर भी मुख्य सचिव ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने रफीगंज प्रखंड के अंतर्गत:
- कर्मा मसूद और
- अहमदनगर में लंबित भूमि अधिग्रहण के मामलों की फाइलें जल्द निपटाने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि भूमि विवाद के कारण विकास का कार्य प्रभावित नहीं होना चाहिए।
विभागों के बीच समन्वय पर जोर
निरीक्षण के अंत में मुख्य सचिव ने जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संबंधित विभाग आपसी तालमेल (Coordination) बेहतर करें ताकि निर्धारित समय-सीमा के भीतर उत्तर कोयल जलाशय का लाभ किसानों को मिल सके।
मुख्य सचिव का यह दौरा संकेत है कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के आलोक में इस प्रोजेक्ट को अब ‘मिशन मोड’ में पूरा किया जा रहा है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा होता है, तो मगध प्रमंडल के हजारों एकड़ खेतों की प्यास बुझेगी