अब 5 साल का इंतजार ख़त्म: 1 साल की नौकरी पर भी मिलेगी ग्रेच्युटी, गिग वर्कर्स को मिली नई पहचान
मोदी सरकार का ‘श्रम सुधार’ मास्टरस्ट्रोक: डिलीवरी बॉयज को मिलेगा इंश्योरेंस, महिलाओं को नाइट शिफ्ट की आजादी और 40 पार वालों को फ्री हेल्थ चेकअप।
नई दिल्ली (स्पेशल रिपोर्ट):
अगर आप प्राइवेट नौकरी करते हैं, कॉन्ट्रैक्ट पर हैं, या फ्रीलांसिंग (गिग वर्क) करते हैं, तो यह खबर आपके लिए राहत भरी है। भारत में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे पुराने श्रम कानूनों (Labor Laws) की छुट्टी हो गई है। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने साफ कर दिया है कि नए ‘श्रम सुधार’ सिर्फ़ कागजी नहीं, बल्कि आपकी जेब और जिंदगी को सुरक्षित करने वाले हैं।
जानिए, इस बड़े बदलाव से आपकी लाइफ में क्या-क्या बदलने वाला है:
ग्रेच्युटी के लिए अब 5 साल नहीं घिसनी होंगी एड़ियां
नौकरीपेशा लोगों का सबसे बड़ा दर्द था—ग्रेच्युटी के लिए 5 साल तक एक ही कंपनी में टिके रहना। नए नियमों (फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट – FTE) के तहत अब यह बाध्यता खत्म हो रही है। अगर कोई कर्मचारी ‘फिक्स्ड टर्म’ के तहत काम करता है, तो उसे भी महज 1 साल की निरंतर सेवा के बाद ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा। यानी छोटी अवधि की नौकरी में भी अब पक्के कर्मचारी जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
‘डिलीवरी बॉयज’ अब मजदूर नहीं, ‘पार्टनर’ होंगे
अब तक जोमैटो, स्विगी, ओला, उबर या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लाखों युवाओं को ‘मजदूर’ की श्रेणी में सही हक नहीं मिलता था। नए लेबर कोड में पहली बार ‘गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ को कानूनी पहचान दी गई है।
- अब उन्हें भी ESIC (कर्मचारी राज्य बीमा निगम) के दायरे में लाया जाएगा।
- सामाजिक सुरक्षा (Social Security) का लाभ मिलेगा।
नारी शक्ति: खदानों में एंट्री, नाइट शिफ्ट में सुरक्षा
महिलाओं के लिए ‘प्रतिबंध’ अब ‘अवसर’ में बदल गए हैं। नए कानूनों के तहत महिलाएं अब अपनी मर्जी से:
- अंडरग्राउंड खदानों (Mines) में काम कर सकेंगी।
- नाइट शिफ्ट (Night Shift) कर सकेंगी।
- शर्त: कंपनी को उनकी सुरक्षा, सहमति और आने-जाने की पुख्ता व्यवस्था करनी होगी।
40 के पार? तो फ्री हेल्थ चेकअप आपका हक
वर्कर्स की सेहत का ख्याल रखते हुए एक बड़ा फैसला लिया गया है। 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी श्रमिकों के लिए वार्षिक स्वास्थ्य जांच (Annual Health Checkup) अनिवार्य कर दी गई है। यह सुविधा उन्हें मुफ्त मिलेगी, जिससे गंभीर बीमारियों का समय रहते पता चल सके।
‘इंस्पेक्टर राज’ का खात्मा
कंपनियों को भी बड़ी राहत दी गई है। पहले दर्जनों रजिस्ट्रेशन और रिटर्न भरने पड़ते थे, लेकिन अब:
- सिंगल रजिस्ट्रेशन (Single Registration)
- सिंगल लाइसेंस (Single License)
- सिंगल रिटर्न फाइलिंग (Single Return Filing) इससे कंपनियों पर कागजी बोझ कम होगा और वे रोजगार बढ़ाने पर फोकस कर सकेंगी।
एक्सपर्ट व्यू: आत्मनिर्भर भारत की नींव
केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के अनुसार, पुराने कानून 1920-1950 के बीच बने थे, जो आज के डिजिटल भारत के लिए बेमानी थे। प्रधानमंत्री मोदी के ‘श्रमेव जयते’ के मंत्र ने 29 पुराने और जटिल कानूनों को खत्म कर 4 सरल लेबर कोड्स (Labor Codes) में बदल दिया है। इसका सीधा मकसद है—श्रमिक का सम्मान और उद्योग का विकास।