वोट के लिए चूल्हे में माटी लगा रहे उम्मीदवार — कुटुंबा में सियासी मुकाबला हुआ और गर्म, राजेश राम बनाम ललन भुइंया में कांटे की टक्कर
औरंगाबाद
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के आख़िरी चरण में औरंगाबाद जिले की कुटुंबा विधानसभा सीट सुर्खियों के केंद्र में है। यहाँ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं उपमुख्यमंत्री पद के दावेदार राजेश राम की जमीनी सक्रियता ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हाल ही में सामने आई एक तस्वीर में वे ग्रामीण क्षेत्र में एक महिला के चूल्हे में माटी लगाते नज़र आए — यह दृश्य अब चुनावी चर्चा का केंद्र बन गया है।
जनता से सीधा जुड़ाव या प्रतीकात्मक संदेश?

राजेश राम की यह तस्वीर राजनीतिक दृष्टि से कई मायनों में अहम है। दो बार के विधायक और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष होने के बावजूद वे अब वोट के लिए सीधे जनता के घर-आंगन तक पहुँच रहे हैं। उनके समर्थक इसे “जनसंवाद का प्रतीक” बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे “घबराहट में की जा रही नाटकीय कवायद” कह रहे हैं।
लेकिन इतना तय है कि इस तस्वीर ने कुटुंबा के चुनावी माहौल में नई गर्मी भर दी है।
असंतोष की आँच, अपने ही वोटर दे रहे हैं चुनौती

राजेश राम की सियासत अब अपने ही समर्थक वर्ग की नाराजगी से जूझ रही है। सूत्रों के मुताबिक, उनके विशेष वोटर समूह और सहयोगी दल के कार्यकर्ताओं में असंतोष है। आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में क्षेत्र के कई हिस्सों में विकास कार्य अपेक्षानुसार नहीं हुए, जिससे एक वर्ग दूरी बना चुका है।
कांग्रेस के अंदर भी कुछ स्थानीय नेताओं का मानना है कि संगठनात्मक स्तर पर संवाद की कमी ने हालात को जटिल बना दिया है।
ललन भुइंया का बढ़ता प्रभाव


इस बार कुटुंबा में मुकाबला सिर्फ दलों के बीच नहीं, बल्कि व्यक्तित्व और जनसंपर्क के स्तर पर भी है। महागठबंधन समर्थित उम्मीदवार ललन भुइंया ने लगातार गांव-गांव जाकर जनता के बीच पैठ बनाई है। उनकी पहचान सर्वदलीय सहयोग और सरल स्वभाव वाले नेता के रूप में उभर रही है।
स्थानीय समीकरणों की बात करें तो भुइंया को कई जातीय समूहों का झुकाव मिल रहा है, जिससे मुकाबला पूरी तरह कांटे का हो गया है।
सवाल अब भी वही — क्या राजेश राम का किला सुरक्षित है?
राजेश राम के पास प्रदेश स्तर की पहचान, संगठन की ताकत और दो बार का अनुभव है। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि जनता अब ठोस काम और स्थानीय जुड़ाव चाहती है। यही वजह है कि इस बार कुटुंबा की जंग “अपने बनाम अपने” की हो गई है।

अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम अपने परंपरागत वोटरों को फिर से एकजुट कर पाएंगे, या असंतुष्ट वर्ग इस बार सर्वदलीय नेता ललन भुइंया की ओर रुख करेगा।
11 नवंबर को जब जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करेगी, तो तय होगा कि कुटुंबा की जनता “अनुभव” पर भरोसा जताती है या “बदलाव” की राह चुनती है।