नवीनगर प्रखंड के कई विद्यालयों में नहीं शिक्षा सेवक, विभाग की अनदेखी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित
संदीप कुमार
औरंगाबाद (नवीनगर): शिक्षा के अधिकार और समान अवसर की बड़ी-बड़ी बातें करने वाला विभाग ही नवीनगर प्रखंड में अपने दिशा-निर्देशों का पालन करने में नाकाम साबित हो रहा है। प्रखंड के दर्जनों विद्यालय ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षा सेवक कार्यरत नहीं है, जबकि दूसरी ओर कई विद्यालयों में चार से पांच तक शिक्षा सेवक तैनात हैं। इस असंतुलन के कारण बच्चों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मध्य विद्यालय बसडीहा और मध्य विद्यालय रामनगर में चार-चार शिक्षा सेवक हैं, जबकि मध्य विद्यालय काला पहाड़ तेंदुआ में पांच शिक्षा सेवक कार्यरत हैं। इसी तरह उर्दू मध्य विद्यालय परसिया, प्राथमिक विद्यालय बारईखाप, मध्य विद्यालय हरिहर उर्दाना और प्राथमिक विद्यालय सुढ़ना में तीन-तीन शिक्षा सेवक मौजूद हैं। वहीं, ऐसे भी कई विद्यालय हैं जहां दो-दो शिक्षा सेवक तैनात हैं।
इसके विपरीत, नवीनगर प्रखंड के कई विद्यालय पूरी तरह शिक्षा सेवक विहीन हैं। पिपरा और मझियावां पंचायत के विद्यालयों में मात्र एक-एक शिक्षा सेवक हैं। मझियावां में हाल ही में एक नई शिक्षा सेवक की बहाली हुई है, जिसपर अवैध नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

गौरतलब है कि विभागीय नियम के अनुसार जहां एक से अधिक शिक्षा सेवक कार्यरत हैं, उनका स्थानांतरण उन विद्यालयों में किया जाना चाहिए जहां शिक्षा सेवक नहीं हैं। बावजूद इसके विभाग की अनदेखी से स्थिति जस की तस बनी हुई है।
प्रत्येक शिक्षा सेवक को अपने संबंधित टोले के 25 बच्चों का नामांकन कराना, प्रतिदिन सुबह कोचिंग देकर विद्यालय भेजना और 20 अशिक्षित महिलाओं को साक्षरता प्रदान करने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं की जानकारी देना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता यह है कि जिन विद्यालयों में दो से अधिक शिक्षा सेवक हैं, वहां नामांकित बच्चों की संख्या बेहद कम है। कई जगह ऐसे भी शिक्षा सेवक तैनात हैं जिनके टोले में महादलित बच्चों की संख्या नहीं है।
ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा विभाग की लापरवाही के कारण गरीब और वंचित तबके के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं। विभाग की “गहरी नींद” न खुलने से सवाल उठ रहा है कि आखिर शिक्षा व्यवस्था की इस खामियों को कौन दूर करेगा?