पीके का एनडीए पर हमला, नीतीश-भाजपा नेताओं को घेरा, जाले की जनता से बड़े वादे
दरभंगा, 20 सितंबर। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने अपनी बिहार बदलाव यात्रा के दौरान दरभंगा जिले के जाले विधानसभा में आयोजित विशाल जनसभा से एनडीए पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने नीतीश कुमार, भाजपा नेताओं और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सख्त तेवर दिखाते हुए कहा कि “जन सुराज की सरकार बनते ही 100 सबसे भ्रष्ट नेता-अफसर जेल की सलाखों के पीछे होंगे।”
पीके ने भाजपा और राजद दोनों को निशाने पर लिया और कहा कि “राजद तो पहले से ही भ्रष्टाचार का पर्याय है, लेकिन भाजपा के नेता उससे भी दो कदम आगे हैं, ये कंबल ओढ़कर घी पी रहे हैं।” उन्होंने दावा किया कि उनके हालिया खुलासों पर अब तक किसी एनडीए नेता ने जवाब नहीं दिया है, क्योंकि “सच कड़वा होता है।”

नीतीश पर करारा तंज – “सुरक्षा घेरे में बैठकर जनता पर लाठीचार्ज”
नीतीश सरकार पर सीधा हमला करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री और उनके मंत्री सुरक्षा घेरे में बैठकर छात्रों और अभ्यर्थियों पर लाठियां चलवा रहे हैं, लेकिन चुनाव के वक्त जब ये वोट मांगने जनता के बीच जाएंगे, तो लोगों का गुस्सा इन्हें झेलना पड़ेगा।
मंत्री जीवेश मिश्रा पर तीखा वार
प्रशांत किशोर ने दरभंगा के मंत्री जीवेश मिश्रा को भी नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा कि “कोर्ट ने उन्हें जाली दवा कारोबारी करार दिया है, अब जाले की जनता भी दो महीने बाद कार्रवाई कर उन्हें बेरोजगार बना देगी।”
जनता से बड़े वादे – पेंशन, मुफ्त शिक्षा और रोजगार
जनसभा में पीके ने बिहार की जनता के सामने कई बड़े ऐलान किए—
दिसंबर 2025 से 60 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को ₹2000 मासिक पेंशन।
15 साल तक के बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त शिक्षा, फीस सरकार देगी।
50 लाख युवाओं को बिहार में ही 10-12 हजार रुपये का रोजगार।
पीके ने कहा कि इस साल बिहार की बदहाली की “आखिरी दिवाली और छठ” होगी। छठ के बाद दरभंगा और बिहार के युवाओं को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ेगा।
बताते चलें कि प्रशांत किशोर का यह हमला एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। दरभंगा मिथिलांचल का राजनीतिक गढ़ है और यहां से भाजपा व एनडीए को मजबूत आधार मिलता रहा है। जीवेश मिश्रा पर सीधा हमला कर पीके ने भाजपा की स्थानीय ताकत को चुनौती दी है।

उनके वादों में पेंशन, शिक्षा और रोजगार की तिकड़ी साफ बताती है कि जन सुराज खुद को “गरीब और युवाओं का विकल्प” बनाने की कोशिश में है।
हालांकि, सवाल यह भी है कि इतने बड़े वादों को लागू करने के लिए संसाधन कहां से आएंगे?
लेकिन राजनीतिक धरातल पर देखें तो पीके का यह संदेश साफ है – “जन सुराज सिर्फ सत्ता की लड़ाई नहीं, बल्कि सिस्टम बदलने का दावा कर रहा है।”