Aurangabad:लोकसभा चुनाव में वोट बहिष्कार की घोषणा करने वाली बागी ‘ नेहुटा’ गांव की मांगें आज भी अधूरी,डेढ़ साल बीत गए जिलाधिकारी का आश्वासन भी हुआ फेल
Magadh Express :लोकसभा चुनावों के दौरान वोट बहिष्कार करके चर्चा में आया औरंगाबाद विधानसभा का नेहुटा गांव आज भी अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान का इंतजार कर रहा है। गांव के लोगों को सबसे बड़ी परेशानी श्मशान घाट तक जाने में होती है, जहां पहुंचने के लिए उन्हें एक नहर पार करनी पड़ती है, जिस पर कोई पुल नहीं बना है।

समस्याएं और विरोध का कारण
बरसात के मौसम में नहर पानी से भर जाती है, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। लोकसभा चुनाव से पहले मनरेगा के तहत नहर की खुदाई करके इसे और गहरा कर दिया गया, जिससे स्थिति और भी खराब हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि इसी कारण एक बार तो शव को ले जा रही अर्थी भी पानी में बहने लगी थी।ईन घटनाओं से परेशान होकर, गांव वालों ने लोकसभा चुनाव में मतदान का बहिष्कार करने का फैसला किया। उस समय, जिलाधिकारी सहित पूरा जिला प्रशासन गांव पहुंचा और आचार संहिता खत्म होने के बाद पुल बनाने का आश्वासन दिया था।

अधूरे वादे और नेताओं की बेरुखी
डेढ़ साल बीत चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों की मांग पूरी नहीं हुई है। गांव के प्रतिनिधिमंडल ने कई बार जिलाधिकारी से मुलाकात की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज ग्रामीणों ने आगामी विधानसभा चुनावों का भी बहिष्कार करने का मन बना लिया है।

हाल ही में, जन सुराज पार्टी के नेता प्रो. अनिल कुमार सिंह ने नेहुटा गांव का दौरा किया। गांव वालों की हालत सुनकर वे भावुक हो गए। उन्होंने ग्रामीणों को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और उनकी मांगों को लेकर सिविल SDO संतन कुमार सिंह से मुलाकात भी की। हालांकि, SDO ने इसे जिलाधिकारी के स्तर का मामला बताकर सिर्फ उनसे मिलने की बात कही।

प्रो. अनिल ने अपनी मांग में कहा, ‘अगर एक महीने के अंदर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो दोबारा बहिष्कार होना निश्चित है।’ उन्होंने मौजूदा जनप्रतिनिधियों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो पार्टियां लोकतंत्र बचाने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही हैं, उन्हीं के सांसद और विधायक इस गांव की दुर्दशा पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।यह सोचने वाली बात है कि अगर जनता मतदान केंद्र तक जाएगी ही नहीं, तो क्या सिर्फ पटना के गांधी मैदान में भाषण देने से लोकतंत्र बच जाएगा? स्थानीय विधायक, सांसद और जिला प्रशासन को जल्द से जल्द नेहुटा गांव के लोगों को न्याय दिलाना चाहिए, वरना सही मायने में लोकतंत्र खतरे में पड़ जाएगा।