राष्ट्रीय :भारत ने 6G मानकीकरण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई: बेंगलुरु में 3GPP की ऐतिहासिक बैठक

0
IMG-20250827-WA0074

Magadh Express:​बेंगलुरु: भारत ने पहली बार 3GPP (थर्ड जनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट) रेडियो एक्सेस नेटवर्क (RAN) कार्य समूह की बैठक की मेजबानी करके वैश्विक दूरसंचार में एक नया अध्याय शुरू किया है। 25 से 29 अगस्त 2025 तक बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड में हो रही इस बैठक में 6G के मानकीकरण और भविष्य के दूरसंचार नेटवर्क को लेकर अहम चर्चाएं हो रही हैं। बैठकें संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) के सहयोग और टेलीकॉम स्टैंडर्ड डेवलपमेंट सोसाइटी, इंडिया (TSDSI) द्वारा आयोजित की जा रही हैं।

​6G पर पहली चर्चा और रिकॉर्ड भागीदारी

​इस बैठक में 3GPP के रिलीज़-20 के तहत 6G मानकीकरण पर पहली बार चर्चा की गई। इसके साथ ही, रिलीज़-19 के विनिर्देशों को अंतिम रूप दिया गया, जो 5G एडवांस्ड के विकास को गति देंगे।
​इस आयोजन ने वैश्विक भागीदारी का एक नया रिकॉर्ड बनाया है। 50 से अधिक देशों के 1,500 से अधिक प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया, जो किसी भी 3GPP कार्य समूह की बैठक में अब तक की सबसे ज़्यादा भागीदारी है। इसमें दुनिया की प्रमुख दूरसंचार कंपनियाँ, अनुसंधान संस्थान और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हैं। यह बढ़ती हुई भागीदारी 5G से 6G की ओर बढ़ रही वैश्विक रुचि को दर्शाती है।

​भारतीय शोधकर्ताओं को मिला सीधा मौका

​बेंगलुरु में बैठक की मेजबानी करना भारतीय शोधकर्ताओं और कंपनियों के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। अब तक, उन्हें इन वैश्विक चर्चाओं में भाग लेने के लिए विदेश यात्रा करनी पड़ती थी। इस बैठक से भारतीय संगठनों को अपने ही देश में वैश्विक विशेषज्ञों के साथ सीधे जुड़ने, अनुभव प्राप्त करने और 6G मानकों को आकार देने में सीधे योगदान देने का मौका मिला है।​यह आयोजन भारत सरकार की 6G विज़न में गहरी रुचि और प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। दूरसंचार विभाग ने इन बैठकों के आयोजन के लिए पूरी संस्थागत और वित्तीय सहायता प्रदान की है।

​भारत का बढ़ता प्रभाव

​TSDSI, भारत का एक मान्यता प्राप्त मानक विकास संगठन है और 3GPP के सात संगठनात्मक भागीदारों में से एक है। 3GPP ही मोबाइल संचार प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक मानक तय करता है। बेंगलुरु में यह आयोजन यह दिखाता है कि वैश्विक मानक-निर्धारण में भारत जैसे देश एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।​यह पहल घरेलू नवाचार को बढ़ावा देगी, उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को मजबूत करेगी और वैश्विक दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में भारत की स्थिति को और मजबूत करेगी।

Author

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed