भारत-अल्जीरिया रक्षा संबंधों को मिलेगी नई मजबूती, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी अल्जीरिया दौरे पर रवाना
नई दिल्ली। भारत और अल्जीरिया के बीच रणनीतिक और रक्षा साझेदारी को और प्रगाढ़ करने के उद्देश्य से भारतीय थल सेनाध्यक्ष (COAS) जनरल उपेंद्र द्विवेदी आज, 25 अगस्त 2025 को, अल्जीरिया की तीन दिवसीय राजकीय यात्रा पर रवाना हो गए। 28 अगस्त तक चलने वाली यह यात्रा दोनों देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग का प्रतीक है।
यह महत्वपूर्ण यात्रा भारत की राष्ट्रपति और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) की हाल की अल्जीरिया यात्राओं के तुरंत बाद हो रही है, जो दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच संबंधों को मजबूत करने की उच्च प्राथमिकता को दर्शाता है।
क्या हैं यात्रा के मुख्य उद्देश्य?
इस यात्रा का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाना है। जनरल द्विवेदी अपनी यात्रा के दौरान अल्जीरिया के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जिनमें शामिल हैं:
- दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग बढ़ाना।
- क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर आपसी दृष्टिकोण साझा करना।
- रक्षा औद्योगिक सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना।
उच्च-स्तरीय बैठकों और सैन्य संस्थानों का दौरा

अपनी यात्रा के दौरान, जनरल द्विवेदी अल्जीरिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के प्रतिनिधि मंत्री और पीपुल्स नेशनल आर्मी के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल सईद चानेग्रिहा, तथा थल सेना कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल मुस्तफा स्माली से मुलाकात करेंगे। वे अल्जीरिया में भारतीय राजदूत डॉ. स्वाति कुलकर्णी के साथ भी बैठक करेंगे।
इसके अतिरिक्त, थल सेनाध्यक्ष टैमेंटफॉस्ट स्थित स्कूल ऑफ कमांड एंड मेजर स्टाफ और चर्चेल मिलिट्री एकेडमी जैसे प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण संस्थानों का भी दौरा करेंगे। वे अल्जीरिया के शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर शहीदों को सम्मान देंगे।
रक्षा उद्योग सहयोग की नींव पर होगी नई इमारत
जनरल द्विवेदी की यह यात्रा उस नींव पर आधारित है जो हाल ही में 30 जुलाई से 01 अगस्त 2025 तक अल्जीयर्स में आयोजित एक डिफेंस सेमिनार में रखी गई थी। इस सेमिनार में भारतीय रक्षा उद्योगों ने अपनी उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया था, जिससे भविष्य में रक्षा प्रौद्योगिकी सहयोग के द्वार खुले हैं।
उम्मीद है कि थल सेनाध्यक्ष की इस यात्रा से भारत और अल्जीरिया के बीच ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूती मिलेगी तथा यह साझा सुरक्षा हितों, क्षेत्रीय स्थिरता और रक्षा सहयोग को बढ़ावा देने में एक मील का पत्थर साबित होगी।