पशुधन और डेयरी क्षेत्र में क्रांति: बिहार में 5 नए डेयरी/दुग्ध चूर्ण संयंत्रों को मिली 316 करोड़ की मंजूरी
बिहार: बिहार राज्य में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, दुधारू पशुओं की नस्ल में सुधार, सहकारिता के विस्तार, ग्रामीण कृषकों की आय में बढ़ोतरी और दुग्ध की गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग ने डेयरी क्षेत्र में एक बड़ा निवेश करने का निर्णय लिया है। राज्य योजना के तहत (सिडबी क्लस्टर विकास निधि (SCDF) द्वारा ऋण सम्पोषित) पांच प्रमुख डेयरी/दुग्ध चूर्ण संयंत्रों की स्थापना हेतु कुल ₹316.31 करोड़ की अनुमानित लागत व्यय की स्वीकृति मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदान की गई है।
ये परियोजनाएं राज्य के कृषि सकल घरेलू उत्पाद में डेयरी की बढ़ती सहभागिता और इसकी अपार संभावनाओं को देखते हुए महत्वपूर्ण हैं।
प्रमुख परियोजनाएं:
- गोपालगंज में डेयरी संयंत्र: 1.00 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी संयंत्र की स्थापना हेतु ₹54.73 करोड़ की स्वीकृति मिली है। यह स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित करेगा और दुग्ध सहकारी समितियों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ता प्रदान करेगा।
- डेहरी-ऑन-सोन, रोहतास में दुग्ध चूर्ण संयंत्र: 30 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध चूर्ण संयंत्र की स्थापना हेतु ₹69.66 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इससे रोजगार के अतिरिक्त अवसर सृजित होंगे तथा दुग्ध के उपयोगिता में बढ़ोतरी होगी।
- सीतामढ़ी में दुग्ध चूर्ण संयंत्र: 30 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता के दुग्ध चूर्ण संयंत्र की स्थापना हेतु ₹70.33 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे दुग्ध उत्पादों की आय में वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा।
- वजीरगंज, गया में डेयरी संयंत्र: 2.00 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी संयंत्र की स्थापना हेतु ₹50.27 करोड़ की स्वीकृति प्रदान की गई है। यह ग्रामीण कृषकों की आय में बढ़ोतरी करेगा।
- दरभंगा में डेयरी संयंत्र: 2.00 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता के डेयरी संयंत्र की स्थापना हेतु ₹71.32 करोड़ की स्वीकृति मिली है। इससे आस-पास के जिलों में गुणवत्तायुक्त दूध की आपूर्ति में वृद्धि होगी और रोजगार के अवसर प्रदान होंगे।
इन सभी परियोजनाओं में सिडबी से ऋण सहायता और कॉमफेड/मिथिला दुग्ध संघ के माध्यम से व्यय की जाने वाली राशि शामिल है। ये निवेश बिहार को दुग्ध उत्पादन और प्रसंस्करण में एक अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित करने में मदद करेंगे, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।