अनुसूचित जाति/जनजाति उद्यमियों के लिए औरंगाबाद में विशेष PMEGP शिविर का आयोजन
औरंगाबाद, बिहार: राज्य में आर्थिक विकास को बढ़ावा देने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने के उद्देश्य से, जिला उद्योग केंद्र, औरंगाबाद में प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत एक विशेष शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह शिविर आज से, यानी 24 जुलाई, 2025 से 26 जुलाई, 2025 तक चलेगा और विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के उद्यमियों पर केंद्रित है।
PMEGP: आत्मनिर्भरता की ओर एक कदम
PMEGP योजना के तहत, उद्यमियों को अपना लघु उद्योग स्थापित करने के लिए बैंकों के माध्यम से ऋण प्रदान किया जाता है। विनिर्माण (Manufacturing) क्षेत्र में अधिकतम ₹50 लाख और सेवा (Service) क्षेत्र में अधिकतम ₹20 लाख तक का ऋण उपलब्ध है। इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ग्रामीण क्षेत्र के लाभार्थियों को ऋण पर 35% और शहरी क्षेत्र के लाभार्थियों को 25% तक अनुदान (सब्सिडी) का प्रावधान है।
जिला उद्योग केंद्र, औरंगाबाद का लक्ष्य है कि इस शिविर के माध्यम से अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के इच्छुक उद्यमियों को बैंकों के साथ समन्वय स्थापित करने में मदद मिले और वे आसानी से योजना का लाभ उठा सकें।
खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी अवसर
इसके अतिरिक्त, ऐसे उद्यमी जिनकी रुचि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लघु उद्योग स्थापित करने की है, वे प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत 35% अनुदान सहित ऋण सुविधा का लाभ ले सकते हैं। इस योजना में फिलहाल सभी वर्गों के उद्यमी आवेदन करने के पात्र हैं।
आवश्यक दस्तावेज़ और आवेदन प्रक्रिया
जिला उद्योग केंद्र, औरंगाबाद ने सभी इच्छुक उद्यमियों से अनुरोध किया है कि वे निर्धारित तिथियों में आवश्यक दस्तावेजों के साथ शिविर में उपस्थित हों ताकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा सके। आवेदकों को निम्नलिखित दस्तावेज़ लाने होंगे:
- हालिया पासपोर्ट साइज फोटो
- आधार कार्ड
- पैन कार्ड
- जाति प्रमाण-पत्र
- निवास प्रमाण-पत्र
- शैक्षणिक प्रमाण-पत्र (न्यूनतम आठवीं पास)
- प्रोजेक्ट रिपोर्ट
- संबंधित बैंक शाखा की पासबुक की छायाप्रति
- ई-मेल आईडी
- मोबाइल नंबर
- ग्राम प्रधान/मुखिया द्वारा निर्गत अनापत्ति प्रमाण-पत्र (केवल ग्रामीण क्षेत्र के लिए)
जिला उद्योग केंद्र, औरंगाबाद यह सुनिश्चित कर रहा है कि अधिक से अधिक पात्र उद्यमी इन योजनाओं का लाभ उठाएं और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। यह पहल राज्य में समावेशी आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।