बिहार में सियासी पारा हाई: तेजस्वी का ‘डर’ वाला वार और RJD का ‘वोटबंदी’ पर संग्राम!
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पटना, बिहार: बिहार की राजनीति इन दिनों गरमाई हुई है। एक तरफ राष्ट्रीय जनता दल (राजद) चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को लेकर सड़कों पर उतरी है, तो दूसरी तरफ युवा राजद नेता तेजस्वी यादव अपने बयानों से सत्ता पक्ष को लगातार निशाने पर ले रहे हैं। आरजेडी का आरोप है कि SIR अभियान के बहाने गरीब, प्रवासी मजदूरों और अल्पसंख्यकों के वोट काटने की साज़िश चल रही है, जबकि तेजस्वी अपने ‘डर’ वाले बयान से सियासी गलियारों में हलचल मचा रहे हैं।
RJD का ‘काला’ विरोध: वोटबंदी का आरोप, सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
राबड़ी देवी के नेतृत्व में राजद के तमाम बड़े नेताओं ने चुनाव आयोग के SIR अभियान के खिलाफ ज़ोरदार प्रदर्शन किया। नेताओं ने काले कपड़े पहनकर ‘मतदान पुनरीक्षण बहाना है, मकसद वोटबंदी लाना है’ जैसे तीखे नारे लगाए। राजद का स्पष्ट आरोप है कि बिहार के लाखों प्रवासी मज़दूरों को वोट देने के अधिकार से वंचित करने की यह एक सुनियोजित चाल है। पार्टी का कहना है कि काम के लिए राज्य से बाहर रहने वाले लाखों लोगों के नाम इस अभियान के ज़रिए मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।
यह मामला अब केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजद ने इस मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर दी है। महागठबंधन के अन्य सहयोगी दलों ने भी इस विरोध में राजद का पूरा साथ दिया है, जो दर्शाता है कि यह एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनने वाला है।
तेजस्वी का ‘डर’ वाला दांव: जब मैं बोलता हूं, सत्ता पक्ष घबराता है!
सियासी तापमान को और बढ़ाने का काम किया है तेजस्वी यादव के तीखे बयानों ने। उन्होंने दावा किया कि जब भी वह सदन में बोलने के लिए खड़े होते हैं, तो सत्ता पक्ष घबरा जाता है, सहम जाता है और बेचैन हो उठता है। तेजस्वी ने अपने बोलने के अंदाज़ को ‘विनम्रता, शालीनता, सत्य, तथ्य और तर्क’ से भरा बताया और कटाक्ष किया कि उनके सवालों का जवाब सत्ता पक्ष के पास नहीं होता।
उन्होंने कहा कि उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के लोग एक-दूसरे का मुँह ताकते हैं, कुछ सिर झुका लेते हैं, और ‘जिनके मन में चोर होता है’, वे सरकार की विफलता का दोषी मानते हुए कुतर्क गढ़ते हैं और कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश करते हैं। तेजस्वी का यह दावा कि जब वह अकेले बोलते हैं तो दर्जनों मंत्री उठ खड़े होते हैं, उनके आत्मविश्वास और राजनीतिक पैंतरेबाज़ी को दर्शाता है।
100 दिन बाद सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी!
तेजस्वी ने बिहार की जनता से आह्वान किया कि उन्हें इस ‘निकम्मी और नकारा सरकार’ से डरने की ज़रूरत नहीं है। उन्होंने भविष्यवाणी की कि महज़ 100 दिनों के भीतर जनता इस सरकार को बाहर का रास्ता दिखाएगी और ‘इनका यह डर हमेशा के लिए निकाल देगी’। यह बयान सीधे तौर पर आगामी चुनावों पर निशाना साधता है और राजद के सत्ता में वापसी के आत्मविश्वास को दर्शाता है।
कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो गया है, जहां मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं विपक्ष का युवा चेहरा सरकार पर सीधा और धारदार हमला कर रहा है। देखना यह होगा कि राजद का यह विरोध और तेजस्वी के ये ‘डर’ वाले बयान आगामी चुनावों में क्या रंग लाते हैं!