वैश्य समाज की ‘हुंकार’: 22% आबादी का दम, अब ‘सियासी तख़्त’ पर होगा कब्ज़ा!
औरंगाबाद: औरंगाबाद की सियासी बिसात पर वैश्य समाज ने रविवार शाम को ऐसी चाल चली है कि बड़े-बड़े राजनीतिक दिग्गजों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। सम्राट अशोक भवन के सभागार में हुए वैश्य प्रतिनिधि सम्मेलन में समाज के नेताओं ने जो तेवर दिखाए हैं, वो साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले चुनावों में वैश्य समाज सिर्फ ‘वोट बैंक’ बनकर नहीं रहेगा, बल्कि ‘सत्ता का सूत्रधार’ बनने को बेताब है!
मुख्य अतिथि सुंदर साहू ने मंच से गरजते हुए सीधे राजनीतिक दलों को चुनौती दी, “अगर वैश्य समाज एकजुट हो गया, तो दिल्ली से लेकर पटना तक, हर सियासी पार्टी को झुकना पड़ेगा! हमारी एकता उन्हें टिकट देने पर मजबूर कर देगी। अब हमें खुद ‘नेता’ बनना होगा, किसी के पीछे चलने का वक्त नहीं रहा!” उनके इन शब्दों से सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

सम्मेलन की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन से हुई, लेकिन माहौल में गर्मी शुरू से ही थी। राजेंद्र गुप्ता ने औरंगाबाद में ‘बापू सभागार’ की मांग उठाते हुए साफ कहा कि 22 प्रतिशत आबादी होने के बावजूद वैश्य समाज को उनका वाजिब प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। “जितनी हिस्सेदारी, उतनी भागीदारी!” का नारा बुलंद करते हुए उन्होंने राजनीतिक दलों को आईना दिखाया।
इस ऐतिहासिक मौके पर वैश्य रत्न और ओबरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी डॉ. प्रकाश चंद्रा, नगर परिषद अध्यक्ष उदय प्रसाद गुप्ता, और वैश्य चेतना समिति के अध्यक्ष ई. सुंदर साहू सहित कई धुरंधर मौजूद रहे। कार्यक्रम की कमान संयोजक जितेंद्र गुप्ता के हाथ में थी और मंच का सफल संचालन रंजय अग्रहरी ने किया।
उदय प्रसाद गुप्ता ने जोश भरते हुए कहा, “अगर जनता में आपकी पैठ है, तो चुनाव जरूर लड़ें! वैश्य समाज का विधायक बन सकता है!” उन्होंने दावा किया कि जब-जब वैश्य समाज का शासन आया, “स्वर्णिम युग” आया।
डॉ. प्रकाश चंद्रा ने अपने चिर-परिचित अंदाज़ में कहा कि वे संघर्ष में विश्वास रखते हैं और समाज के हर वर्ग के लिए लड़ेंगे। उन्होंने शोषितों के लिए खड़े होने का आह्वान करते हुए कहा, “समाज आपको प्रतिष्ठा देगा!”
देव नगर पंचायत के चेयरमैन ने डॉ. प्रकाश चंद्रा को विधानसभा भेजने की अपील करते हुए जन जागृति फैलाने का बीड़ा उठाया। संयोजक जितेंद्र गुप्ता ने ‘समाज को जोड़कर चलने’ की अहमियत पर जोर दिया। अमित गुप्ता ने तो डॉ. प्रकाश चंद्रा को ‘वैश्य समाज का सर्वमान्य नेता’ तक घोषित कर दिया! संजय गुप्ता ने सभी से अपील की कि अगर कोई भी वैश्य समाज का व्यक्ति चुनाव लड़े, तो सभी खुलकर उसकी मदद करें! दिलीप कुमार गुप्ता ने राजनीतिक पार्टियों पर सीधा आरोप लगाया कि वे आबादी के अनुपात में टिकट नहीं देतीं और राष्ट्रीय पार्टियां तो उन्हें ‘नजरअंदाज’ ही करती हैं।
अंत में, उदय प्रसाद गुप्ता ने दृढ़ता से कहा कि अगर वैश्य समाज एकजुट हो जाए, तो राजनीतिक उद्देश्य पूरे हो सकते हैं और सामाजिक कार्यों में भागीदारी से सफलता निश्चित मिलेगी! उन्होंने ‘सकारात्मक सोच’ अपनाने पर विशेष जोर दिया।
इस सम्मेलन ने औरंगाबाद में राजनीतिक हलचल को एक नया आयाम दिया है। वैश्य समाज ने साफ कर दिया है कि आने वाले चुनावों में वे सिर्फ एक दर्शक नहीं, बल्कि एक निर्णायक खिलाड़ी की भूमिका निभाएंगे। क्या राजनीतिक दल इस ‘हुंकार’ को सुनेंगे और वैश्य समाज की ‘सियासी ताकत’ को स्वीकार करेंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा!