
पूजन बिहार के लगभग सभी हिंदू घरों में होता है । बात जब पूजा की हो तो देसी घी अनिवार्य सामग्री है । मान्यता और परम्परा के हिसाब से पूजन में गाय का देसी घी ही उपयोग में लाना चाहिए लेकिन जब तमाम दुकानदार जो पूजन सामग्री बेच रहे है उनके यहां जाएं और घी मांगेंगे तो तो आपको जो घी मिलेगा वह बहुत ही सस्ता मिल जायेगा और आप वही घी घर पर लाकर पूजा में उपयोग कर रहे है। आप जिस घी को पूजा में उपयोग कर रहे है वह वास्तव में पूजा घी है ही नही । पूजा के नाम 200 रुपए से लेकर 400 रुपए किलोग्राम का घी आपको सभी जिलों में जिलों के नामचीन पूजन भंडार में बिकता मिलेगा जिसकी बिक्री जोरों पर है । सस्ता होने और विकल्प न होने के कारण लोग बड़े आराम से वही पूजा का घी ला रहें है और पूजन कर रहे है ।
विक्रेताओं की चांदी, अधिकारी चिरनिद्रा में , फूड इंस्पेक्टर को कानो कान खबर नहीं
इस तरह का घी बाजार में आपको तमाम दुकानों पर उपलब्ध है और बड़ी मात्रा में इनका निर्माण और विक्रय हो रहा है जिसके के निर्माता और विक्रेता दोनों ही टैक्स की चोरी भी कर रहें है और मोटी कमाई भी कर रहे है । इस बाबत पदाधिकारियों द्वारा कोई संज्ञान नहीं लिया जाता है यही कारण है की विक्रेता धड़ल्ले से इस नकली घी का असली कारोबार कर रहे है । लोगो को भी पूजा के लिए सस्ता घी ही चाहिए इस लिए यही ला रहे है और विक्रताओ के जेब को भरने में मदद ही नहीं कर रहे अपितु देवता पूजन में भी उसी घी का दीपक जला रहे है जिसे वे खुद नहीं खा सकते । ये एक बहुत ही चिंताजनक मामला है । नकली घी का ये असली व्यापार करोड़ों का है । हर जिले में एक नए ब्रांड का घी मिल जायेगा और कुछ तो बहुत ही बड़े लेवल पर ये काम कर रहे है।

बड़ा स्तर पर होता है नकली घी का असली कारोबार
डिब्बे पर साफ लिखा होता है , खाने में उपयोग न करें
इस तरह के घी के डब्बे पर आपको लिखा मिल जायेगा की कृपया इसे खाने में इस्तेमाल न करें फिर ग्राहकों को ये सोचना जरूरी है की इस घी को पूजा में कैसे इस्तेमाल किया जा सकता है ।
आखिर ये पूजा घी बनता कैसे है । ग्राहक को भी नही पता है की आखिर पूजा के नाम पर बिकने वाला ये घी वाकई में बनता कैसे है । जब इसकी जानकारी जुटाने में मगध एक्सप्रेस की टीम ने अलग अलग सूत्रों से जानकारी निकालनी शुरू की तो पता चला की इसमें डालडा , पाम ऑयल , सूजी और कई खतरनाक कैमिकल के इस्तेमाल किया जाता है जो स्वास्थ्य के लिहाज से बहुत ही खतरनाक है । इस घी में सिर्फ 5 से लेकर 10 फीसदी तक देसी घी मिलाया जाता है बाकी 90 फीसदी का मिलावट किया जा रहा है मोटी कमाई की जा रही है ।
बिहार सरकार सहित जिला प्रशासन को ध्यान देना चाहिए और मिलावटी घी निर्माता और विक्रेता दोनो पर नकेल कसनी चाहिए ।