औरंगाबाद: सिंचाई योजनाओं की धीमी गति पर डीएम सख्त, 31 परियोजनाओं की हुई विस्तृत समीक्षा

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Magadh Express:औरंगाबाद जिले में किसानों को समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में आज समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में जल संसाधन विभाग की एक महत्वपूर्ण समीक्षात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में संचालित सिंचाई एवं नहर पुनर्स्थापन से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति का लेखा-जोखा लिया गया।

​31 योजनाओं की समीक्षा, 12 अभी भी लंबित

​बैठक के दौरान सिंचाई प्रमंडल (दाउदनगर), सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल (औरंगाबाद) और सोन उच्चस्तरीय नहर प्रमंडल (टेकारी) के अंतर्गत चल रही कुल 31 योजनाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई। समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार:

  • कार्य पूर्ण/अंतिम चरण: 18 योजनाएं।
  • प्रगति पर: 01 योजना।
  • कार्य शुरू नहीं हो सका: 12 योजनाएं।

​अधिकारियों ने बताया कि जिन 12 योजनाओं में काम शुरू नहीं हो सका है, उनके पीछे योजना कोड निर्गत न होना, पूर्व में किए गए कार्य और वर्तमान में मानसून की सक्रियता व नहरों में जल प्रवाह जैसी तकनीकी बाधाएं मुख्य कारण हैं।

​किसानों के हित में कराए जा रहे हैं व्यापक कार्य

​इस बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि इन योजनाओं के माध्यम से न केवल नहरों की मरम्मत की जा रही है, बल्कि राजवाहा, वितरिणी और ग्रामीण नालों की गाद और जंगल सफाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य भी प्राथमिकता के आधार पर किए जा रहे हैं। जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि जिन योजनाओं में भौतिक कार्य पूर्ण हो चुके हैं, उनकी मापी और भुगतान की प्रक्रिया में अनावश्यक देरी न की जाए। वहीं, जिन योजनाओं की लागत 10 लाख रुपये से अधिक है, उनके लिए कोड आवंटन की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।

​डीएम के सख्त निर्देश: ‘समय-सीमा का करें पालन’

​समीक्षा के उपरांत जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा ने कार्यपालक अभियंताओं को कड़े निर्देश दिए:

  1. गुणवत्ता सुनिश्चित करें: प्रगति पर चल रही योजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर मानक के अनुरूप पूरा किया जाए।
  2. समस्याओं का समाधान: तकनीकी या प्रशासनिक कारणों से लंबित योजनाओं के लिए विभागीय बाधाओं को शीघ्र दूर कर कार्य धरातल पर उतारें।
  3. नियमित मॉनिटरिंग: कार्यपालक अभियंता प्रत्येक सप्ताह प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करें ताकि कार्यों की लगातार निगरानी की जा सके।
  4. परिस्थितियों का आकलन: वर्षा या जल प्रवाह के कारण जिन योजनाओं का काम रुका है, वहां मौसम अनुकूल होते ही पूरी ताकत के साथ काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

​बैठक में निदेशक डीआरडीए अनुपम कुमार, डीपीओ मनरेगा सहित संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंता एवं अन्य अधिकारी मौजूद रहे। जिला प्रशासन का मुख्य ध्येय यह सुनिश्चित करना है कि आने वाले फसल चक्र के दौरान किसानों को सिंचाई के लिए नहरों का पूरा लाभ मिल सके।

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