औरंगाबाद: ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ की धीमी गति पर जिलाधिकारी सख्त, शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने का निर्देश

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​Magadh Express:औरंगाबाद जिले में ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के प्रभावी क्रियान्वयन और स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार, 16 जुलाई 2026 को समाहरणालय स्थित कार्यालय प्रकोष्ठ में जिला पदाधिकारी श्रीमती अभिलाषा शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में टीबी के खिलाफ जारी जंग में कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए।

बैठक की मुख्य बातें और समीक्षा:

​समीक्षा के दौरान जिले में टीबी उन्मूलन के विभिन्न पैमानों पर प्रगति की विस्तृत चर्चा की गई:

  • निक्षय एनरोलमेंट: जिले का लक्ष्य 6,43,143 व्यक्तियों के पंजीकरण का है, जिसके सापेक्ष अभी तक मात्र 2,65,733 (41%) लोगों का ही पोर्टल पर पंजीकरण हो पाया है। जिला पदाधिकारी ने नाराजगी जताते हुए सभी प्रखंडों को एनरोलमेंट की गति तेज करने का आदेश दिया।
  • एक्स-रे जांच: पोर्टल पर पंजीकृत व्यक्तियों की तुलना में एक्स-रे जांच का आंकड़ा मात्र 6% (15,478) रहा। डीएम ने संभावित रोगियों की पहचान के लिए एक्स-रे जांच की संख्या में तत्काल वृद्धि करने पर जोर दिया।
  • एनएएटी (NAAT) जांच: यह एक सकारात्मक पहलू रहा, जहां 900 के लक्ष्य के विरुद्ध 872 जांचें (97%) पूरी कर ली गई हैं। शेष बची जांचों को भी जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है।
  • डिफरेंशिएटेड टीबी केयर: जिले में कुल 1,957 टीबी रोगियों में से 1,304 को ही यह विशिष्ट सुविधा मिल सकी है, जबकि 653 मरीज अभी भी इस सेवा से वंचित हैं। इन्हें प्राथमिकता पर उपचार से जोड़ने का निर्देश दिया गया है।
  • निक्षय पोषण योजना (NPY): पोषण सहायता के मामले में भी काफी काम बाकी है। 1 जनवरी 2025 से अब तक कुल 3,390 मरीजों में से 1,502 को ही लाभ मिला है, जबकि 1,888 मरीज अभी भी भुगतान की बाट जोह रहे हैं। प्रशासन ने इस प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया है।

प्रशासन की कार्ययोजना

​जिला पदाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि अभियान के हर घटक की नियमित मॉनिटरिंग की जाए। टीबी के संभावित मरीजों की जल्द पहचान, त्वरित जांच, नियमित उपचार और पोषण सहायता सुनिश्चित करना अब विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। डीएम ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए ‘जनभागीदारी’ (Community Participation) पर भी बल दिया।

​बैठक में सिविल सर्जन, जिला कार्यक्रम प्रबंधक (स्वास्थ्य), जिला योजना पदाधिकारी श्री अविनाश प्रकाश सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

निचोड़: प्रशासन का स्पष्ट संकेत है कि टीबी मुक्त औरंगाबाद का सपना तभी साकार होगा जब स्वास्थ्य केंद्र से लेकर ब्लॉक स्तर तक की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति आएगी। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य विभाग एक सप्ताह के भीतर इन लंबित लक्ष्यों को पूरा करने में कितनी तत्परता दिखाता है।

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