Aurangabad:रफीगंज: 15वीं वित्त आयोग की राशि में अनियमितता का मामला, प्रखंड प्रमुख से मांगा गया स्पष्टीकरण

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Magadh Express:बिहार के औरंगाबाद जिले के रफीगंज प्रखंड में 15वीं वित्त आयोग की योजनाओं के भुगतान में कथित अनियमितता और मनमानी को लेकर जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिला प्रशासन ने प्रखंड प्रमुख गीता सिंह को कारण बताओ (Show Cause) नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा है।

क्या है पूरा मामला?

​यह कार्रवाई पंचायत समिति के सदस्यों द्वारा जिलाधिकारी को दी गई सामूहिक शिकायत के बाद की गई है। सदस्यों का आरोप है कि प्रखंड में विकास कार्यों का भुगतान प्रमुख स्तर पर जानबूझकर लंबित रखा गया है।

  • भुगतान में देरी: क्षेत्र संख्या-27 की पंचायत समिति सदस्य अजबुन निशा ने शिकायत की है कि 15वीं वित्त आयोग की योजना संख्या 34/2025-26 और 80/2025-26 का कार्य एक साल पहले पूरा हो चुका है। प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) द्वारा प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद प्रमुख की स्वीकृति न मिलने से मजदूरों और वेंडरों का भुगतान अटका हुआ है।
  • कमीशनखोरी का आरोप: क्षेत्र संख्या-23 की पंचायत समिति सदस्य जैनब फहमी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कई योजनाओं में सामग्री का भुगतान तो कर दिया गया, लेकिन मजदूरों और वेंडरों के भुगतान के एवज में कमीशन की मांग की जा रही है।
  • अन्य शिकायतें: पंचायत समिति सदस्य जनेश्वर पासवान ने भी भुगतान अस्वीकृत किए जाने को लेकर प्रशासन से शिकायत की थी।

प्रशासन की चेतावनी

​जिला प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि एक सप्ताह के भीतर प्रमुख की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 44(4) के तहत उन्हें पद से हटाने की अनुशंसा राज्य सरकार को भेज दी जाएगी। गौरतलब है कि इस मामले की जांच प्रखंड विकास पदाधिकारी और प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारी द्वारा संयुक्त रूप से की जा चुकी है।

प्रमुख का पक्ष

​वहीं, दूसरी ओर प्रखंड प्रमुख गीता सिंह ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने इसे निराधार बताते हुए कहा:

​”मुझ पर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। कुछ लोग गलत वाउचर लगाकर भुगतान प्राप्त करना चाहते थे और नियमों के विरुद्ध काम कराना चाहते थे। मैंने स्वयं जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। आरोप लगाने वालों पर मैं मानहानि का मुकदमा दर्ज करूंगी।”

पंचायत समिति सदस्यों में आक्रोश

​प्रशासन की इस कार्रवाई का पंचायत समिति सदस्यों और उनके प्रतिनिधियों ने स्वागत किया है। सदस्यों का कहना है कि 15वीं एवं षष्ठम वित्त आयोग की राशि उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान न होने से विकास कार्य पूरी तरह प्रभावित हैं। उन्होंने मांग की है कि सभी क्षेत्रों में उपलब्ध राशि का उपयोग समान रूप से पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित कराया जाए, ताकि मजदूरों और वेंडरों को राहत मिल सके।

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