औरंगाबाद की प्रमुख विकास परियोजनाओं को मिली गति: पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह की पहल पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने लिया संज्ञान
Magadh Express:औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के विकास और आम जनमानस की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने एक बार फिर सक्रियता दिखाई है। उन्होंने बिहार सरकार के उप मुख्यमंत्री सह पथ निर्माण एवं जल संसाधन मंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर अपने संसदीय क्षेत्र की महत्वपूर्ण अधोसंरचना परियोजनाओं के लंबित कार्यों को शीघ्र पूरा करने की मांग की है।
मुख्यमंत्री सचिवालय का सख्त निर्देश
पूर्व सांसद द्वारा उठाए गए जनहित के मुद्दों को मुख्यमंत्री सचिवालय ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री सचिवालय के उप सचिव कुमार ब्रजेश ने इस संबंध में पथ निर्माण विभाग और जल संसाधन विभाग के सचिवों को आधिकारिक पत्र जारी किया है।
जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि पूर्व सांसद द्वारा प्रेषित मांग पत्रों पर नियमानुसार अविलंब जांच की जाए। साथ ही, इन परियोजनाओं को गति देने के लिए उचित निर्णय लेते हुए की गई कार्रवाई की सूचना मुख्यमंत्री सचिवालय और पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए।

इन प्रमुख परियोजनाओं पर है फोकस
पूर्व सांसद ने अपनी मुलाकात के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित जनहित कार्यों पर जोर दिया:
- NH-139 का फोरलेन निर्माण: औरंगाबाद क्षेत्र की जीवन रेखा माने जाने वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग को फोरलेन में परिवर्तित करना, जिससे आवागमन सुगम हो सके।
- बटाने जलाशय परियोजना: बिहार और झारखंड की सीमा पर स्थित इस महत्वपूर्ण अंतर्राज्यीय सिंचाई परियोजना के लंबित कार्यों को पूर्ण कराना, ताकि क्षेत्र के किसानों को बेहतर सिंचाई सुविधा मिल सके।
- सड़कों का चौड़ीकरण: क्षेत्र में बेहतर कनेक्टिविटी के लिए तीन प्रमुख पथों को दो लेन में चौड़ा करने की मांग की गई है:
- परैया से टिकारी भाया हिच्छापुर/गुरुआ से दरियापुर (शेरघाटी-चेरकी पथ)।
- S.H-101 का मदनपुर से गया तक का हिस्सा।
जनहित के प्रति प्रतिबद्धता
सुशील कुमार सिंह लगातार अपने क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और आम जनता की समस्याओं को सरकार के समक्ष रखने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि ये परियोजनाएं न केवल क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक हैं, बल्कि इनके पूरा होने से लाखों लोगों का सफर आसान होगा।
अब देखना यह है कि संबंधित विभाग मुख्यमंत्री सचिवालय के इस निर्देश पर कितनी तत्परता से अमल करते हैं और इन महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लाभ जनता को कब तक मिल पाता है।
