गया: बांकेबाजार थानाध्यक्ष मंटू कुमार निलंबित, अवैध वसूली और स्वेच्छाचारिता के आरोपों पर आईजी ने की बड़ी कार्रवाई

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Magadh Express:गया जिले के बांकेबाजार थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए, पुलिस महानिरीक्षक (IG), मगध क्षेत्र ने थानाध्यक्ष (SHO) मंटू कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर अवैध तरीके से वाहन जब्त करने, फरियादी से पैसे की मांग करने और वरीय अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना करने का गंभीर आरोप है।

घटना का विवरण: जबरन सुलह और 4 लाख की अवैध मांग

मामले की शुरुआत 20 मई 2026 की शाम को हुई, जब ठेकेदार अमरेन्द्र पाठक ने मगध रेंज के आईजी को फोन कर अपनी व्यथा बताई। पीड़ित ने आरोप लगाया कि बांकेबाजार में हिसाब-किताब के दौरान स्थानीय लोगों ने न केवल उनके साथ मारपीट की, बल्कि उनकी टाटा सफारी गाड़ी भी छीन ली और उन्हें जबरन थाना ले आए।
पीड़ित का आरोप था कि थानाध्यक्ष मंटू कुमार ने उनका आवेदन लेने के बजाय उल्टे उन पर ही 10 लाख रुपये देने का दबाव बनाया। जब पीड़ित ने इस अनुचित मांग को मानने से इनकार किया, तो उनके साथ थाना परिसर में ही मारपीट की गई और उन्हें घंटों बैठाकर रखा गया।

वरीय अधिकारियों के निर्देशों को किया अनसुना

आईजी ने घटना के तुरंत बाद थानाध्यक्ष को फोन कर विधि-सम्मत कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, थानाध्यक्ष ने किसी प्रकार का सहयोग नहीं किया। इसके बाद आईजी ने वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP), गया को निर्देशित कर शेरघाटी के अंचल निरीक्षक को जांच के लिए भेजा। अंचल निरीक्षक के निर्देश के बावजूद थानाध्यक्ष केवल सुलह-समझौते का दबाव बनाते रहे।

जांच में खुली पोल

4 जून 2026 को पीड़ित अमरेन्द्र पाठक ने पुनः आईजी कार्यालय में उपस्थित होकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि थानाध्यक्ष ने उनके साथ गाली-गलौज की और गाड़ी छोड़ने की एवज में 4 लाख रुपये का चेक देने की मांग की। इतना ही नहीं, उनसे और उनके पिता से जबरन सुलहनामे पर हस्ताक्षर भी करवाए गए।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), शेरघाटी-01 द्वारा की गई जांच में ये सभी आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के अनुसार:

  • थानाध्यक्ष ने बिना किसी आवेदन या जप्ती सूची के पीड़ित की गाड़ी को अवैध रूप से थाना परिसर में रखा।
  • उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी अपने वरीय पदाधिकारियों को नहीं दी।उच्चाधिकारियों के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद वे मनमानी करते रहे।

पुलिस की छवि धूमिल करने पर सख्त एक्शन

जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आईजी ने माना कि थानाध्यक्ष का आचरण न केवल संदिग्ध है, बल्कि यह घोर लापरवाही और स्वेच्छाचारिता को दर्शाता है। इससे पुलिस विभाग की छवि धूमिल हुई है। पुलिस महानिरीक्षक ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए पु०अ०नि० मंटू कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें केवल जीवन-यापन भत्ता ही देय होगा और उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही शुरू की गई है।
यह घटना पुलिस महकमे में कड़ा संदेश है कि कानून के रक्षक यदि कानून को हाथ में लेंगे, तो उनके खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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