Aurangabad:देव में विराट शिव गुरु महोत्सव का आयोजन: शिवमय हुआ सूर्य नगरी,जन-जन के गुरु बने शिव,हजारों की संख्या में पहुंचे शिव शिष्य
Magadh Express: भगवान भास्कर की नगरी देव (औरंगाबाद) स्थित रानी तालाब के मैदान में रविवार को एक विराट शिव गुरु महोत्सव का सफल आयोजन किया गया। इस महोत्सव में बिहार सहित अन्य प्रदेशों से आए शिव शिष्यों का भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा, जो इस आयोजन की व्यापकता को दर्शाता है।

महोत्सव का मुख्य उद्देश्य
इस महोत्सव का केंद्रीय और मुख्य उद्देश्य इस कालखंड के प्रथम शिव शिष्य, साहब श्री हरींद्रानंद जी का संकल्प ‘जन, जन के शिव गुरु हों’ को जनमानस तक पहुंचाना था। दूर-दराज से आए सभी वक्ताओं ने इस विषय पर अपना वक्तव्य दिया और लोगों को अपने दिलों में भगवान शिव को अपना गुरु बनाने की प्रेरणा दी।
तीन सूत्र: शिव को गुरु बनाने का मार्ग
महोत्सव के मुख्य आयोजक शिवपूजन सिंह ने उपस्थित शिव शिष्य परिवार को संबोधित करते हुए कहा कि साहब श्री हरींद्रानंद जी ने जनमानस को शिव को अपना गुरु बनाने के लिए तीन सरल सूत्र दिए हैं, जिनके माध्यम से लोग आज शिव को अपना गुरु बना रहे हैं।

उन्होंने बताया कि ये तीन सूत्र हैं:
- दया मांगना: नियमित रूप से शिव से दया की याचना करना।
- चर्चा करना: शिव गुरु की चर्चा करना।
- प्रणाम निवेदित करना: अपने गुरु को ‘नमः शिवाय’ से प्रणाम निवेदित करना।
शिवपूजन सिंह ने दृढ़ता से कहा कि जो भी व्यक्ति ईमानदारी पूर्वक प्रत्येक दिन इन तीनों सूत्रों का अनुपालन करेगा, उसके जीवन में सचमुच में शिव गुरु हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज महोत्सव में उपस्थित यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि अगर शिव वास्तविकता में गुरु नहीं होते, तो लोग अपना काम-काज और घर-परिवार छोड़कर यहां क्यों आते।

बढ़ता कारवाँ और जीवन में सुख
आयोजकों ने बताया कि जब से साहब श्री ने शिव गुरु की तराना छेड़ी है, तब से शिव शिष्यों का कारवाँ लगातार बढ़ता जा रहा है। आज लोग गुरु की दया पाकर अपना जीवन सुखमय और शिवमयी बना रहे हैं। उन्होंने साहब श्री के कथन को दोहराया कि “किसी भी आयोजन का प्रयोजन सही होना चाहिए,” और शिव चर्चा का एकमात्र उद्देश्य साहब श्री के संकल्प को जन-जन तक पहुंचाना है।
कहावत चरितार्थ है: “चंदा मामा घर-घर के मामा, शिव घर-घर के बाबा हैं।” साहब श्री ने इस बाबा से गुरु-शिष्य की परंपरा के नाम से एक रिश्ता जोड़ने की प्रेरणा दी है।

1984 से शुरू हुई गुरु पद की परंपरा
शिवपूजन सिंह ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान शिव को भारत के इतिहास में सबसे प्राचीन देवता के रूप में पूजा जाता है, लेकिन उनके गुरु पद से जुड़ने का सिलसिला सन 1984 से साहब श्री के द्वारा शुरू किया गया। उन्होंने बताया कि साहब श्री से पहले भी लोगों ने शिव को गुरु बनाया था, जैसा कि किताबें बताती हैं, लेकिन उन्होंने जनमानस को इसकी सूचना नहीं दी और स्वयं ‘बाबा’ बनकर रह गए। जनमानस के कल्याण हेतु साहब श्री ने ही जगत में तीन सूत्र दिए और लोगों में शिव का शिष्य बनने की प्रेरणा जगाई।

नाम के नहीं, काम के गुरु हैं शिव
झारखंड से आए अखिलेश गुरु भाई ने अपने वक्तव्य में कहा कि “शिव नाम के नहीं, काम के गुरु हैं।” उन्होंने ज़ोर दिया कि शिव गुरु के दया का पात्र होने के लिए मानव को उनका अपना स्थाई शिष्य भाव देना अनिवार्य होगा और इसके लिए साहब श्री के बताए मार्ग पर शत प्रतिशत चलने की आवश्यकता है।

भजन और मंच संचालन
- कार्यक्रम की शुरुआत दीदी नीलम आनंद द्वारा स्वरचित संकीर्तन भजन “हर भोला हर शिव” के साथ की गई।
- मधेपुरा सिंघेश्वर से आए गणेश झा के भजनों को सुनकर श्रोताओं ने आनंदित महसूस किया।
- मंच का सफल संचालन स्थानीय गुरु भाई अर्जुन सिंह के द्वारा किया गया।
प्रमुख उपस्थिति
इस अवसर पर मुख्य रूप से देव नगर पंचायत अध्यक्ष पिंटू शाहील , समाजसेवी लक्ष्मण गुप्ता, दिनेश गुप्ता (चंडीगढ़), केदार प्रसाद, वीर बहादुर सिंह (सिंहेश्वर मधेपुरा), मिथिलेश सिंह, नरेश सिंह, पूनम देवी, अंबिका देवी (छत्तीसगढ़), नरेंद्र मोदी, कैलाश प्रसाद, महेश प्रसाद, भारतेंदु बॉस (दिल्ली), मुकेश सिंह, डॉ संतोष भारती, रविंद्र सिंह, दीनदयाल विश्वकर्मा, राखी देवी, माधुरी देवी, प्रेमा भारती, उदय सिंह, अर्जुन सिंह, मनु सिंह, जगरनाथ गुप्ता, संगीता देवी, अभिषेक सिंह, हिमांशु सिंह, धीरज गुप्ता, पहलाद सिंह, और राजू गुप्ता समेत हजारों शिव शिष्य उपस्थित थे।इस दौरान हजारों की संख्या में महिला पुरुष शिव शिष्य पहुंचे थे ।
