ओबरा में ‘समाधान’ वाली सियासत: कड़ाके की ठंड में जनता दरबार की गर्मी, समस्याओं का ऑन-द-स्पॉट निपटारा और सम्मान में ‘गरमा-गरम’ भोजन

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ओबरा (औरंगाबाद)। राजनीति में जब संवेदना और सक्रियता का मिलन होता है, तो नजारा ओबरा के जनता दरबार जैसा होता है। भीषण शीतलहर और गिरते पारे के बीच नव-निर्वाचित विधायक डॉ. प्रकाश चंद्रा की अनूठी पहल ने आज ओबरा में सैकड़ों चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। यहाँ न केवल समस्याओं की फाइलें खुलीं, बल्कि उन्हें बंद करने (समाधान) का सरकारी संकल्प भी दिखा।

अधिकारियों की ‘फ़ौज’ के बीच न्याय की आस

​ओबरा के इस जनता दरबार की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि यहाँ विधायक के साथ-साथ प्रशासन की पूरी टीम मौजूद थी। BDO, CO, मनरेगा PO, बिजली विभाग के सहायक अभियंता, श्रम विभाग के अधिकारी और राजस्व कर्मचारियों ने एक-एक कर फरियादियों की बात सुनी।

  • खास बात: जमीन विवाद हो या मनरेगा की मजदूरी, बिजली का बिल हो या प्रशासनिक ढिलाई—हर मुद्दे पर संबंधित अधिकारी को मौके पर ही निर्देश दिए गए।

ठंड को दी मात: समस्या सुनी और ‘सम्मान’ की थाली भी परोसी

​भीषण ठंड के कारण अक्सर लोग सरकारी दफ्तरों की चौखट तक नहीं पहुँच पाते, लेकिन डॉ. प्रकाश चंद्रा ने इसका समाधान भी निकाला। दूर-दराज के गांवों से सुबह-सुबह आए लोगों के लिए भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी।

​”कोई भी व्यक्ति भूख या असुविधा की वजह से अपनी समस्या बताए बिना वापस न लौटे, यही हमारा लक्ष्य है।” — डॉ. प्रकाश चंद्रा (विधायक, ओबरा)

महीने के हर ‘जनता दरबार’ से बढ़ रहा भरोसा

​अभी इसी महीने की 3 तारीख को दाउदनगर में हुए जनता दरबार की सफलता के बाद, ओबरा का यह आयोजन विधायक की लोकप्रियता में चार चाँद लगा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने लंबे समय बाद ऐसा ‘एक्टिव जनप्रतिनिधि’ देखा है जो दफ्तरों के बजाय जनता के बीच समाधान ढूंढ रहा है।

विधायक का विजन: “हर महीने होगा हिसाब”

​विधायक डॉ. प्रकाश चंद्रा ने स्पष्ट किया कि यह सिलसिला थमने वाला नहीं है। उन्होंने घोषणा की है कि हर महीने जनता दरबार का आयोजन किया जाएगा ताकि विकास कार्यों की समयबद्ध समीक्षा हो सके और जनता-प्रशासन के बीच की दूरी कम हो।

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