मदनपुर: विकास या ‘मौत का जाल’? निर्माणाधीन खुले नाले ने बढ़ाई ग्रामीणों की धड़कनें, प्रशासन के खिलाफ फूटा आक्रोश

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मदनपुर (औरंगाबाद)। एक तरफ सरकार जल निकासी के लिए करोड़ों की योजनाएं चला रही है, तो दूसरी तरफ विभाग की लापरवाही इन योजनाओं को जनता के लिए मुसीबत बना रही है। ताजा मामला मदनपुर प्रखंड मुख्यालय के सरस्वती मोहल्ला का है, जहाँ लघु सिंचाई जल संसाधन विभाग द्वारा बनाया जा रहा नाला ग्रामीणों के लिए ‘खतरनाक जाल’ साबित हो रहा है। नाले पर ढक्कन न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने अब सीधे मगध प्रमंडल आयुक्त (गया), जिलाधिकारी (औरंगाबाद) और डीडीसी को पत्र लिखकर निर्माण में अनियमितता की शिकायत की है।

हादसे को दावत देता ‘तीन फीट’ गहरा गड्ढा

​सरस्वती मोहल्ला स्थित सूर्य मंदिर तालाब से इस्लामपुर गांव तक बन रहे इस पक्के नाले की गहराई लगभग तीन फीट है। ग्रामीणों का कहना है कि यह इलाका बेहद व्यस्त है। इसी रास्ते से मासूम स्कूली बच्चे गुजरते हैं और यहीं साप्ताहिक बाजार भी लगता है। सबसे बड़ी चिंता छठ पर्व को लेकर है, जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु सूर्य मंदिर तालाब पर आते हैं। ढक्कन विहीन यह नाला कभी भी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

तकनीकी खामी और भ्रष्टाचार के आरोप

​ग्रामीणों ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि निर्माण में तकनीकी मानकों की अनदेखी की जा रही है।

  • समतलीकरण का अभाव: नियमतः नाला सड़क के समानांतर होना चाहिए, लेकिन यहाँ ऐसा नहीं है। बरसात के समय सड़क की मिट्टी नाले में भरेगी, जिससे लाखों की लागत से बना यह नाला जाम हो जाएगा।
  • आवागमन ठप: नाले के कारण लोगों का अपने घरों से निकलना और वाहनों का परिचालन पूरी तरह बाधित हो गया है।
  • अनियमितता: ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया जा रहा है और विभाग मौन है।

ग्रामीणों की दो टूक: ‘जाँच हो और ढक्कन लगे’

​इंद्रदेव यादव, सिंधु कुमार पासवान, अवधेश यादव, रविन्द्र शर्मा और असलम शाह सहित दर्जनों ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नाले पर ढक्कन नहीं लगाया गया और निर्माण की जाँच नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। उनकी मांग है कि ईंट जोड़कर नाले को सड़क के स्तर पर लाया जाए और उसे पूरी तरह कवर किया जाए ताकि जानवर और बच्चे सुरक्षित रह सकें।

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