Aurangabad:पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की जयंती पर ‘सेवा सम्मान’ की अनूठी पहल,समाजसेवी ने स्वच्छता दूतों के पैर धोकर किया स्वागत, अंगवस्त्र देकर किया सम्मानित

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Magadh Express:-औरंगाबाद जिले के देव नगर पंचायत अंतर्गत दतु बिगहा गांव में आज, गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती ‘सेवा और सम्मान दिवस’ के रूप में धूमधाम से मनाई गई। स्थानीय समाजसेवी आलोक सिंह ने अपने आवास पर आयोजित इस समारोह में समाज के सबसे महत्वपूर्ण, किंतु उपेक्षित वर्ग—स्वच्छताकर्मियों—को विशेष सम्मान देकर एक नई मिसाल पेश की।

स्वच्छता दूतों के पैर धोकर किया अभिनंदन

इस गरिमामय आयोजन की शुरुआत एक मार्मिक दृश्य के साथ हुई। समाजसेवी आलोक सिंह ने देव नगर पंचायत क्षेत्र में कार्यरत सभी स्वच्छताकर्मियों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए, स्वयं उनके पैर धोकर उनका अभिनंदन किया। यह कृत्य समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान और श्रम के प्रति गहरे सम्मान को दर्शाता था।

वाजपेयी जी के चित्र पर अर्पित की श्रद्धा

स्वागत सत्कार के पश्चात, सभी उपस्थित लोगों ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र पर पुष्पार्चन किया और दीप प्रज्वलित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आलोक सिंह ने इस दौरान कहा कि वाजपेयी जी का जीवन सुशासन, सर्वधर्म समभाव और राष्ट्र सेवा का प्रतीक है, जिसे हमें अपने कार्यों में उतारना चाहिए।


अंगवस्त्र भेंट कर किया गया सम्मान
श्रद्धांजलि सभा के उपरांत, आलोक सिंह ने सभी स्वच्छताकर्मियों को अंगवस्त्र भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “ये हमारे समाज के सच्चे ‘स्वच्छता दूत’ हैं, जिनकी निस्वार्थ सेवा के बिना नगर को स्वच्छ रखना असंभव है। आज पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी जी की जयंती पर हम उनके श्रम को नमन करते हैं।”समारोह में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों ने समाजसेवी आलोक सिंह की इस पहल की सराहना की, जिसने समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का भाव उजागर किया।

संबोधित करते हुए समाजसेवी आलोक सिंह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिवस, 25 दिसंबर को, देश भर में सुशासन दिवस (Good Governance Day) के रूप में मनाया जा रहा है। इस दिन का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावशीलता को बढ़ावा देना है, ताकि प्रशासन आम जनता के लिए अधिक सुलभ और नागरिक-केंद्रित बन सके।


सुशासन दिवस का महत्व

​सुशासन दिवस की शुरुआत 2014 में हुई थी। यह दिन सिर्फ वाजपेयी जी को श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं है, बल्कि उनके शासनकाल के उस दर्शन को याद करने का भी दिन है, जिसमें उन्होंने कहा था, “शासन सिर्फ नियम-कानूनों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि जनता की सेवा और उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए।”

देश के प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए कहा, “सुशासन एक सतत प्रक्रिया है। हमारी सरकार का हर कदम समावेशी विकास और अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने के अटल जी के सपने को साकार करने की दिशा में समर्पित है।”

इस दौरान स्वच्छता ग्राही मनीष राम , ललन राम , बाबूराम , पिंकी देवी , टूटू राम , गंगा राम , दुर्गा राम , फेकन राम , प्रीतम डोम जितेंद्र भुइयां , रवि डोम , नाकु भुइयां , राकेश भुइयां , किशनदेव डोम , सुनील डोम , उमेश भुइयां ,चंदन डोम , विजय डोम , शंभु डोम , दिनेश भुइयां , सोनालाल डोम , चंद्रमोहन डोम , उदित डोम , पंकज डोम , पप्पू डोम , दिनानाथ भुइयां , साजन कुमार , सहित स्वच्छता पर्यवेक्षक हंसराज सिंह , एवं अन्य को अंगवस्त्र देकर सम्मानित किये इस अवसर पर बड़े भाई दीपक कुमार सिंह , सामाजिक कार्यकर्ता रिंकू सिंह , शशांक शेखर , रितेश जायसवाल , शत्रुघ्न चौधरी , धनंजय कुमार पांडेय , सुधीर विश्वकर्मा , आदित्य शास्वत , निखिल रंजन , सूजीत कुमार सिंह , संतोष कुमार यादव उपस्थित रहे ।

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