बोधगया: 2 लाख के लिए ‘हैवान’ बने बाराती, लड़की वालों को रॉड से पीटा; पुलिस ने पीड़ितों को थाने से खदेड़ा

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सुर्खियां:

  • दहेज के ‘दानवों’ का तांडव: 2 लाख के लिए तोड़ी शादी, लोहे की रॉड से लड़की वालों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा
  • बोधगया पुलिस का अमानवीय चेहरा: खून से लथपथ पीड़ितों को थाने से भगाया, मीडिया के दबाव में दर्ज की FIR

​भगवान बुद्ध की ज्ञान भूमि बोधगया में एक शादी समारोह उस वक्त रणक्षेत्र में तब्दील हो गया, जब दहेज के लोभियों ने मानवता की सारी हदें पार कर दीं। 29 नवंबर की रात बकरौर स्थित ‘उत्सव पैलेस’ में खुशियों की शहनाई की जगह चीख-पुकार गूंज उठी। दहेज में अतिरिक्त 2 लाख रुपये नहीं मिलने पर नशे में धुत दूल्हे और उसके परिजनों ने लड़की वालों पर जानलेवा हमला बोल दिया। हद तो तब हो गई जब न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंचे पीड़ित परिवार को पुलिस ने दुत्कार कर भगा दिया।

क्या है पूरा मामला?

अतरी के डिहुरी निवासी सुरेश प्रसाद की बेटी कविता कुमारी की शादी बोधगया के हथियार गांव निवासी महेंद्र प्रसाद के बेटे पवन कुमार से तय हुई थी। लड़की पक्ष का आरोप है कि तिलक में 10 लाख रुपये नकद और सोने के जेवर देने के बावजूद, वर पक्ष की लालच कम नहीं हुई। जयमाला के वक्त दूल्हे पक्ष ने अचानक 2 लाख रुपये और मांग लिए। असमर्थता जताने पर शराब के नशे में चूर बारातियों ने लोहे की रॉड और लाठी-डंडों से लड़की वालों पर हमला कर दिया।

मेहमानों को रॉड से पीटा, महिलाओं के जेवर नोचे

इस खूनी संघर्ष में दुल्हन के जीजा शैलेश कुमार और भतीजे सुमन कुमार को बेरहमी से पीटा गया, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। आनन-फानन में उन्हें मगध मेडिकल कॉलेज रेफर करना पड़ा। दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, आरोप है कि उपद्रवियों ने महिलाओं के साथ अभद्रता की और दुल्हन की चाची नीलम देवी के गले से सोने की चेन छीन ली। पुलिस के आने की भनक लगते ही आरोपी मौके से फरार हो गए। शादी को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है।

खाकी पर गंभीर सवाल: FIR के लिए पीड़ित को ही थाने से खदेड़ा

इस घटना का सबसे शर्मनाक पहलू बोधगया पुलिस का रवैया रहा। पीड़ित परिवार का आरोप है कि जब वे घटना के तुरंत बाद लिखित आवेदन लेकर थाने पहुंचे, तो पुलिस ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही थाने से भगा दिया। पुलिस ने आवेदन में लिखी बातों को बदलने का दबाव बनाया।

​पीड़ितों का कहना है, “हम अपने साथ हुई दरिंदगी की सच्चाई लिखाना चाहते थे, लेकिन पुलिस इसे दबाना चाहती थी। दूसरे दिन भी हमें टरकाया गया।” अंततः जब मामला मीडिया के संज्ञान में आया और दबाव बना, तब जाकर पुलिस ने बेमन से आवेदन स्वीकार किया।

अब कार्रवाई होगी या लीपापोती?

दहेज प्रताड़ना, लूटपाट, छेड़छाड़ और जानलेवा हमले की धाराओं में मामला तो दर्ज हो गया है, लेकिन पुलिस की शुरुआती आनाकानी ने उसकी मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह है कि क्या बोधगया पुलिस इन ‘दहेज के भेड़ियों’ को सलाखों के पीछे भेजती है, या फिर अपराधियों को खुला संरक्षण मिलता रहेगा?

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