ऐतिहासिक फैसला: देव और उमगा मंदिर को बचाने के लिए पटना हाईकोर्ट सख्त! ASI को 4 हफ्ते में ‘हेल्थ ऑडिट’ पेश करने का आदेश
औरंगाबाद की धरोहरों के लिए जगी उम्मीद, केंद्र और राज्य सरकार को हाईकोर्ट का कड़ा निर्देश।
पटना/औरंगाबाद: बिहार की ऐतिहासिक विरासत और औरंगाबाद की पहचान माने जाने वाले ‘देव सूर्य मंदिर’ और ‘उमगा मंदिर’ के संरक्षण को लेकर पटना हाईकोर्ट ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। ऐतिहासिक धरोहरों की खस्ताहाल स्थिति पर चिंता जताते हुए कोर्ट ने भारत सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को सख्त निर्देश दिए हैं।
खबर के मुख्य बिंदु:
4 हफ्ते का अल्टीमेटम: एक्टिंग चीफ जस्टिस सुधीर सिंह और जस्टिस राजेश कुमार वर्मा की खंडपीठ ने ASI को निर्देश दिया है कि वह 4 सप्ताह के भीतर दोनों मंदिरों की ‘हेल्थ ऑडिट रिपोर्ट’ (Health Audit Report) कोर्ट में पेश करे।
राज्य सरकार को निर्देश: कोर्ट ने बिहार सरकार को भी शपथ पत्र (Affidavit) दाखिल करने को कहा है, जिसमें यह बताना होगा कि इन स्थलों के संरक्षण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं और मौजूदा स्थिति क्या है।
किसने दायर की थी याचिका: यह आदेश सिविल रिट याचिका संख्या 16861/2025 पर सुनवाई के दौरान आया। यह जनहित याचिका वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता सिद्धेश्वर विद्यार्थी और वरिष्ठ पत्रकार व इतिहासकार प्रेमेंद्र कुमार मिश्रा ने दायर की थी।
वकील की दलील: याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता सुमन सौरभ ने कोर्ट को बताया कि देव और उमगा मंदिर विश्व स्तरीय धरोहर हैं, लेकिन लापरवाही के कारण इनका ढांचा क्षतिग्रस्त हो रहा है। अगर जल्द विशेषज्ञ संरक्षण नहीं मिला, तो इन्हें बचाना मुश्किल होगा।
हाईकोर्ट के इस हस्तक्षेप को राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को बचाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अब उम्मीद है कि पुरातत्व विभाग के विशेषज्ञों की देखरेख में इन प्राचीन मंदिरों का जीर्णोद्धार हो सकेगा। अगली सुनवाई 4 सप्ताह बाद होगी।