औरंगाबाद: दाखिल-खारिज में लेटलतीफी पर डीएम सख्त, सीओ को लगाई फटकार; एक सप्ताह का दिया अल्टीमेटम
- सदर अंचल में सबसे ज्यादा 170 मामले लंबित, डीएम ने जताई नाराजगी
- हसपुरा अंचल के काम की तारीफ, 75 दिनों से अधिक का कोई भी मामला पेंडिंग नहीं
औरंगाबाद जिले में जमीन से जुड़े मामलों के निपटारे में हो रही देरी को लेकर जिला पदाधिकारी (डीएम) श्रीकांत शास्त्री ने कड़ा रुख अपनाया है। शनिवार को समाहरणालय सभाकक्ष में आयोजित राजस्व कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में डीएम एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के लंबित मामलों को लेकर अंचल अधिकारियों (CO) को कड़ी फटकार लगाई और एक सप्ताह के भीतर सभी पेंडिंग मामलों को निपटाने का सख्त आदेश दिया।

364 मामले 75 दिनों से अटके
समीक्षा के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जिले में दाखिल-खारिज के कुल 364 मामले ऐसे हैं, जो 75 दिनों से अधिक समय से लंबित हैं। डीएम ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए अधिकारियों की क्लास लगाई।
आंकड़ों पर गौर करें तो सबसे खराब स्थिति औरंगाबाद सदर अंचल की है, जहां सर्वाधिक 170 मामले लंबित पाए गए। वहीं, हसपुरा अंचल ने बेहतरीन काम किया है, वहां 75 दिनों से अधिक पुराना एक भी मामला लंबित नहीं है, जिसके लिए डीएम ने हसपुरा सीओ की पीठ थपथपाई।
परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण में तेजी
बैठक में भारतमाला परियोजना, एनएच-98, एनएच-2 और रेल विकास निगम से जुड़े भूमि अधिग्रहण कार्यों की भी समीक्षा की गई।
- कुल 756 अभिलेखों (92.39 एकड़) में से 682 अभिलेखों (86.07 एकड़) का निष्पादन किया जा चुका है।
- उत्तर कोयल नहर परियोजना के मामले में देव, मदनपुर, कुटुंबा और नबीनगर अंचलों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा, जहां 16 में से 15 मामलों का निष्पादन हो चुका है।
पारदर्शिता लाने के निर्देश
डीएम श्रीकांत शास्त्री ने अधिकारियों को स्पष्ट कहा कि राजस्व प्रशासन में पारदर्शिता होनी चाहिए। बैठक में भूमि मापी, लगान वसूली, सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज और ‘परिमार्जन प्लस पोर्टल’ के कार्यों की भी समीक्षा की गई।
बैठक में एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह, एडीएम (आपदा) उपेंद्र पंडित, सदर एसडीओ संतन कुमार सिंह, डीसीएलआर श्वेतांक लाल समेत सभी अंचल अधिकारी मौजूद रहे।