औरंगाबाद में ‘लोकतंत्र की जीत’: शांतिपूर्ण विधानसभा चुनाव 2025; नक्सल गढ़ में भी जमकर हुई वोटिंग,बदल गया इतिहास: नक्सलवाद पर लोकतंत्र का वार,खामोश हो गई बंदूकें
Magadh Express: औरंगाबाद जिले के छह विधानसभा क्षेत्रों में विधानसभा चुनाव 2025 का मतदान कार्य कड़ी सुरक्षा के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। इस बार के चुनाव ने जिले के पूर्व के चुनावी इतिहास को पूरी तरह से बदल दिया है, जो कि जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री की कुशल नीति और पुलिस अधीक्षक अम्बरीष राहुल की प्रभावी कार्यकुशलता का सीधा परिणाम है। उनकी रणनीति ने यह सुनिश्चित किया कि चुनाव पूरी तरह से शांतिपूर्ण और निष्पक्ष ढंग से संपन्न हो।

बदल गया इतिहास: नक्सलवाद पर लोकतंत्र का वार
औरंगाबाद जिले में पहले शायद ही कोई ऐसा चुनाव हुआ हो जब प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) ने चुनाव बहिष्कार की घोषणा न की हो। पूर्व के सभी चुनावों में, नक्सलियों की पोस्टरबाजी, दहशत और हिंसक घटनाएँ आतंक का पर्याय बन गई थीं। ये गतिविधियाँ चुनाव प्रक्रिया के दौरान भय का माहौल पैदा करती थीं।

लेकिन, विधानसभा चुनाव 2025 में एक अभूतपूर्व बदलाव देखने को मिला:न कहीं नक्सली पोस्टर दिखी।न कोई दहशत का माहौल बना।न ही कोई पोस्टरबाजी की घटना सामने आई।

मतदाताओं का उत्साह: नक्सल गढ़ में भी सुबह से लंबी कतारें
सबसे महत्वपूर्ण और उत्साहजनक पहलू यह रहा कि जिन इलाकों को वर्षों से नक्सलियों का गढ़ माना जाता रहा है, वहाँ भी मतदाताओं ने खुलकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।अहले सुबह से ही पुरुष और महिला मतदाता बड़ी संख्या में घरों से बाहर निकले।वे लाइन में कतारबद्ध होकर खड़े रहे और जमकर वोटिंग की।

यह उत्साहपूर्ण भागीदारी इस बात की ओर स्पष्ट संकेत करती है कि औरंगाबाद के नक्सल इलाकों में अब ‘लोकतंत्र का कब्जा’ हो गया है, और इसके विपरीत, वामपंथ की समाप्ति की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।जिला प्रशासन और पुलिस की सधी हुई और अग्रिम रणनीति ने मतदाताओं के मन से भय को पूरी तरह से समाप्त कर दिया, जिससे वे बिना किसी डर के अपने संवैधानिक अधिकार का प्रयोग कर सके।

सफल प्रशासन: निर्णायक नेतृत्व
जिलाधिकारी श्रीकांत शास्त्री और पुलिस अधीक्षक अम्बरीष राहुल की जोड़ी ने इस चुनाव को शांतिपूर्ण, भयमुक्त और उच्च मतदान प्रतिशत वाला बनाने में निर्णायक भूमिका निभाई है। उनका सफल आयोजन न केवल एक प्रशासनिक जीत है, बल्कि यह जिले के आम नागरिकों और लोकतंत्र में उनके विश्वास की भी एक बड़ी जीत है।यह चुनाव औरंगाबाद के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है, जहाँ भय और हिंसा के ऊपर शांति और नागरिक भागीदारी ने जीत हासिल की है।
