Aurangabad,घटना के 4 दिन बाद भी लापता शव – हमजा की मौत पर नेतागिरी, और प्रशासन की नींद में बह गया इंसाफ”
औरंगाबाद के टिकरी मोहल्ले का नाला इस बार सिर्फ बरसाती पानी नहीं बहा रहा था, बल्कि बहा ले गया 8 साल के मासूम हमजा की जिंदगी और साथ ही उजागर कर गया नगर परिषद का भ्रष्ट और संवेदनहीन चेहरा।

चार दिन बीत गए, लेकिन प्रशासन की सुस्त रफ़्तार और खानापूर्ति भर की तलाश के बाद भी हमजा का शव नहीं मिल सका। स्थानीय लोगों का कहना है — यह कोई हादसा नहीं, बल्कि “लापरवाह सिस्टम द्वारा की गई हत्या” है। वो सिस्टम, जिसके अफसर सिर्फ़ फाइलों और कमीशन में डूबे रहते हैं, और नेता सिर्फ चुनावों में जागते हैं।

बारिश के दौरान मोहल्ले में हसौली और बिजौली नहर का पानी घुसना कोई नई बात नहीं, लेकिन इसे रोकने के सारे वादे कागजों में दम तोड़ चुके हैं। नाले पर जाली लगाने की बात सालों से चल रही है, मगर अमल सिर्फ फोटो खिंचवाने तक ही सीमित है।

हादसे के बाद नेताओं की भीड़ मौके पर उमड़ी — कैमरों के सामने आंसू बहाए गए, लेकिन लोगों ने साफ़ कहा कि ये संवेदना नहीं, बल्कि “लाश पर राजनीति” है। वोट बैंक की चिंता में जनता के जख्म सिर्फ़ टटोले गए, भरे नहीं।

गुस्साए लोगों ने सड़कों पर उतरकर नारेबाज़ी की और मांग की कि दोषी अधिकारियों और नेताओं पर सख्त कार्रवाई हो। सवाल अब भी वही है:
हमजा का कातिल कौन? और कब तक औरंगाबाद हर बारिश में मौत की गिनती करेगा?